Phone Battery Tips: आज के दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है. सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक ज्यादातर काम मोबाइल फोन के जरिए ही पूरे होते हैं. ऐसे में जब फोन की बैटरी जल्दी खत्म होने लगे तो परेशानी बढ़ना स्वाभाविक है. कई लोग शिकायत करते हैं कि उनका फोन दिन में एक से अधिक बार चार्ज करना पड़ता है, जबकि कुछ यूजर्स पुराने स्मार्टफोन की बैटरी को लेकर खासतौर पर परेशान रहते हैं.
हालांकि, हर बार बैटरी जल्दी खत्म होने का मतलब यह नहीं होता कि आपको नई बैटरी लगवाने की जरूरत है. कई बार फोन की कुछ सेटिंग्स ही बैटरी की सबसे बड़ी दुश्मन बन जाती हैं. अच्छी बात यह है कि कुछ आसान बदलाव करके आप अपने स्मार्टफोन की बैटरी लाइफ को काफी हद तक बढ़ा सकते हैं और बार-बार चार्जिंग की परेशानी से राहत पा सकते हैं.
स्क्रीन सेटिंग्स बैटरी की सबसे बड़ी खपत
स्मार्टफोन में सबसे ज्यादा बैटरी डिस्प्ले यानी स्क्रीन खर्च करती है. जितनी ज्यादा स्क्रीन एक्टिव रहेगी और जितनी ज्यादा ब्राइटनेस होगी, बैटरी उतनी ही तेजी से खत्म होगी. इसलिए सबसे पहले फोन की डिस्प्ले ब्राइटनेस को जरूरत के अनुसार कम रखें. ऑटो ब्राइटनेस फीचर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है.
इसके अलावा स्क्रीन टाइमआउट की अवधि कम कर दें. स्क्रीन टाइमआउट का मतलब है कि फोन इस्तेमाल बंद करने के बाद स्क्रीन कितनी देर में अपने आप बंद होगी. अगर इसे 5 से 10 सेकंड पर सेट कर दिया जाए तो अनावश्यक बैटरी खपत को काफी हद तक रोका जा सकता है.
Always-On Display बंद करना होगा फायदेमंद
आजकल कई स्मार्टफोन Always-On Display फीचर के साथ आते हैं, जिसमें स्क्रीन बंद होने के बाद भी समय, नोटिफिकेशन और अन्य जानकारी दिखाई देती रहती है. यह फीचर देखने में आकर्षक जरूर लगता है, लेकिन लगातार बैटरी की खपत भी करता रहता है. यदि बैटरी बैकअप बढ़ाना चाहते हैं तो इस फीचर को बंद करना एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
डार्क मोड बचा सकता है बैटरी
फोन में उपलब्ध डार्क मोड या नाइट मोड केवल आंखों को आराम देने के लिए ही नहीं, बल्कि बैटरी बचाने के लिए भी उपयोगी माना जाता है. खासकर AMOLED और OLED डिस्प्ले वाले स्मार्टफोन में डार्क मोड बैटरी की खपत कम करने में मदद कर सकता है. यही वजह है कि कई टेक कंपनियां भी बैटरी बचाने के लिए डार्क थीम इस्तेमाल करने की सलाह देती हैं.
ज्यादा रिफ्रेश रेट बढ़ाती है बैटरी खपत
आजकल अधिकांश स्मार्टफोन 90Hz, 120Hz और उससे अधिक रिफ्रेश रेट के साथ आ रहे हैं. इससे स्क्रीन पर स्क्रॉलिंग और एनीमेशन काफी स्मूद दिखाई देते हैं. हालांकि, इसकी कीमत बैटरी को चुकानी पड़ती है. ज्यादा रिफ्रेश रेट फोन की पावर खपत बढ़ा देता है. ऐसे में यदि बैटरी बैकअप बढ़ाना चाहते हैं तो सेटिंग्स में जाकर रिफ्रेश रेट को स्टैंडर्ड या कम विकल्प पर सेट कर सकते हैं.
बैकग्राउंड में चल रहे ऐप्स पर रखें नजर
कई बार फोन में मौजूद ऐप्स बिना इस्तेमाल किए भी बैकग्राउंड में लगातार काम करती रहती हैं. ये ऐप्स इंटरनेट, लोकेशन और अन्य सेवाओं का इस्तेमाल करके बैटरी की खपत बढ़ाती रहती हैं. फोन की बैटरी सेटिंग्स में जाकर यह आसानी से देखा जा सकता है कि कौन-सी ऐप सबसे ज्यादा बैटरी खर्च कर रही है. यदि कोई ऐप जरूरत से ज्यादा बैटरी इस्तेमाल कर रही हो तो उसकी बैकग्राउंड एक्टिविटी को सीमित किया जा सकता है.
अनयूज्ड ऐप्स हटाना भी जरूरी
कई लोग अपने फोन में दर्जनों ऐसे ऐप्स इंस्टॉल करके रखते हैं जिनका महीनों तक इस्तेमाल नहीं होता. ये ऐप्स स्टोरेज घेरने के साथ-साथ बैटरी पर भी असर डाल सकते हैं. ऐसे में समय-समय पर फोन की समीक्षा करें और जिन ऐप्स का इस्तेमाल नहीं करते उन्हें अनइंस्टॉल कर दें. इससे फोन की परफॉर्मेंस भी बेहतर हो सकती है और बैटरी पर भी दबाव कम होगा.
सफर के दौरान फ्लाइट मोड बन सकता है मददगार
यदि आप यात्रा कर रहे हैं या ऐसी जगह मौजूद हैं जहां नेटवर्क कमजोर है, तो फोन बार-बार सिग्नल खोजने की कोशिश करता है. इससे बैटरी तेजी से खत्म होने लगती है. ऐसी स्थिति में फ्लाइट मोड का इस्तेमाल बैटरी बचाने का आसान तरीका हो सकता है. फ्लाइट मोड ऑन करने पर फोन लगातार नेटवर्क खोजने की कोशिश नहीं करेगा, जिससे बैटरी की खपत कम हो जाएगी.
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