Social Media Child Safety: बच्चों की सुरक्षा पर सरकार सख्त, Meta ने उठाया बड़ा कदम

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Social Media Child Safety: भारत सरकार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हानिकारक और अवैध सामग्री के खिलाफ लगातार सख्त कदम उठा रही है. खास तौर पर बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा को लेकर सरकार का रुख स्पष्ट है. सरकार ने कहा है कि भारत में काम करने वाले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए बच्चों को ऑनलाइन नुकसान से बचाना एक मौलिक जिम्मेदारी है और इस मामले में किसी तरह का समझौता नहीं किया जा सकता. इसी कड़ी में Meta ने बाल सुरक्षा से जुड़े मामलों को संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों तक पहुंचाने और रिपोर्ट करने पर सहमति जताई है. सरकार के मुताबिक, बच्चों के लिए सोशल मीडिया को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में यह एक अहम कदम है, हालांकि इस दिशा में अभी और काम किए जाने की जरूरत है.

दूसरे प्लेटफॉर्म पर भी सरकार की नजर

सरकार केवल Meta तक सीमित नहीं है. अधिकारियों की ओर से दूसरे डिजिटल और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के साथ भी लगातार बातचीत की जा रही है. कोशिश यह सुनिश्चित करने की है कि बच्चों से जुड़ी हानिकारक या अवैध सामग्री की पहचान जल्द हो और उसे प्लेटफॉर्म से हटाया जाए. सरकार ने साफ कर दिया है कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम नहीं उठाने वाले प्लेटफॉर्म के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है. सरकार का जोर केवल आपत्तिजनक सामग्री को हटाने पर नहीं, बल्कि उसके दोबारा प्लेटफॉर्म पर आने और फैलने से रोकने पर भी है.

हटाई गई सामग्री दोबारा अपलोड होने पर भी फोकस

इससे पहले 18 अगस्त की एक रिपोर्ट में बताया गया था कि इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और Meta के बीच हुई बातचीत में खास तौर पर ऐसी अवैध सामग्री पर चर्चा हुई थी, जिसे एक बार हटाए जाने के बाद दोबारा प्लेटफॉर्म पर साझा किया जाता है. सरकार का मानना है कि किसी सामग्री को एक बार डिलीट कर देना ही पर्याप्त नहीं है. अगर वही सामग्री नए अकाउंट, नए फॉर्मेट या किसी दूसरे तरीके से फिर से प्लेटफॉर्म पर पहुंच जाती है, तो उससे निपटने के लिए भी प्रभावी व्यवस्था होनी चाहिए.

Meta मजबूत कर रही तकनीकी व्यवस्था

Meta की ओर से ऐसे मामलों की पहचान और उन्हें हटाने के लिए अपनी तकनीकी प्रणालियों को मजबूत किया जा रहा है. कंपनी उन कंटेंट की दोबारा पहचान करने पर भी काम कर रही है, जिन्हें पहले ही चिन्हित करके प्लेटफॉर्म से हटा दिया गया था. इसके लिए उन्नत तकनीक और कंटेंट डिटेक्शन सिस्टम का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि पहले से पहचानी जा चुकी सामग्री किसी नए रूप या अलग तरीके से दोबारा प्लेटफॉर्म पर दिखाई देने पर उसे जल्द पकड़ा जा सके. बाल यौन शोषण से जुड़ी सामग्री को भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध माना जाता है. ऐसे मामलों में सामग्री की पहचान, उसे हटाना और संबंधित मामलों की रिपोर्टिंग बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है.

कानून का पालन नहीं करने पर सेफ हार्बर पर असर

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार ने Meta समेत डिजिटल प्लेटफॉर्म को यह भी स्पष्ट किया है कि भारतीय कानूनों और लागू नियमों का पालन करना जरूरी है. नियमों का पालन नहीं करने की स्थिति में प्लेटफॉर्म को सेफ हार्बर के तहत मिलने वाली कानूनी सुरक्षा पर सवाल उठ सकता है. सेफ हार्बर व्यवस्था के तहत डिजिटल प्लेटफॉर्म को यूजर्स की ओर से पोस्ट की गई सामग्री के लिए कुछ परिस्थितियों में सीमित कानूनी संरक्षण मिलता है. हालांकि, सरकार का कहना है कि यह संरक्षण कानूनों और निर्धारित जिम्मेदारियों के पालन से जुड़ा हुआ है.

सरकार ने सेंसरशिप से किया इनकार

अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार का उद्देश्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सेंसरशिप लागू करना नहीं है. सरकार की प्राथमिकता यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म भारत के कानूनों और नियमों का पालन करें. सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया कंपनियों को अभिव्यक्ति और डिजिटल सेवाओं की उपलब्धता के साथ-साथ समाज पर पड़ने वाले संभावित नुकसान और बच्चों की सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दों के बीच उचित संतुलन बनाना होगा.

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