24 घंटे में तैयार होगा पूरा घर! चार्लोट ने किया कमाल, इंसानों की नौकरी पर मंडरा रहा खतरा

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Spider Robot: सिडनी में एक ऐसा रोबोट तैयार किया जा रहा है जो महज एक दिन में पूरा घर बना सकता है. मकड़ी के आकार वाले इस रोबोट को नाम चार्लोट (Charlotte) है. इस रोबोट को लेकर डेवलपर्स का दावा है कि यह 2,150 स्क्वायर फीट तक के घर की मजबूत दीवारें पूरी तरह ऑटोनॉमस तरीके से खड़ी कर सकता है.

इसकी सबसे बड़ी खासियत ये है कि इसके लिए न तो सीमेंट की ढुलाई की जरूरत होती है और न ही ईंटों की यह रोबोट साइट पर ही मिट्टी, रेत और साफ वेस्ट को दबाकर लेयर-बाय-लेयर दीवारें बना देता है.

चार्लोट- अगली पीढ़ी का निर्माण रोबोट

Earth.com के मुताबिक, चार्लोट एक मोबाइल, पैरों वाला सिस्टम है जो 3D प्रिंटिंग और एडिटिव मैन्युफैक्चरिंग को मिलाकर काम करता है. इसकी डिजाइन दिखाती है कि भविष्य का निर्माण क्षेत्र किस दिशा में आगे बढ़ रहा है. Crest Robotics के डायरेक्टर क्लाइड वेब्स्टर की टीम ने इसे खास तौर पर उन निर्माण कार्यों के लिए विकसित किया है जो भारी, दोहराए जाने वाले या जोखिम भरे होते हैं.

Earthbuilt Technology के डॉ. जेन गोलेंबिव्स्की की मानें तो ईंट जैसी साधारण चीज़ भी कई कार्बन-इंटेंसिव प्रक्रियाओं से गुजरती है. ऐसे में Charlotte जैसे सिस्टम कार्बन उत्सर्जन को भारी मात्रा में कम कर सकते हैं.

मिट्टी से मकान तक निर्माण की नई तकनीक

दरअसल, Crest की तकनीक में एक विशेष अंडरकैरेज सिस्टम मिट्टी, रेत और क्रश्ड वेस्ट इकट्ठा करके उसे टेक्सटाइल बाइंडिंग के साथ लेयर्स में दबाता है. यह तकनीक एक्सट्रूज़न पर आधारित है अर्थात नोज़ल से सामग्री को लगातार लेयर के रूप में निकालकर दीवारें बनाई जाती हैं. टीम की मानें तो यह रोबोट 100 मज़दूरों की स्पीड से काम कर सकता है. उसके पैरों की वजह से यह ऊबड़-खाबड़ जमीन पर भी आसानी से चल सकता है जहां पहिए वाले मशीनें फंस जाती हैं.

कम होगा कार्बन उत्सर्जन और लागत

बता दें कि साल 2022 में निर्माण क्षेत्र का 37% कार्बन उत्सर्जन में योगदान था. ऐसे में चार्लोट का सीमेंट-फ्री तरीका कार्बन फुटप्रिंट काफी घटा सकता है. इसके साथ ही यह साफ वेस्ट को मजबूत दीवारों में बदलकर लागत भी कम करता है. दोहराए जाने वाले और जोखिम भरे काम रोबोट संभाल लेंगे जिससे मानव श्रम को चोट का खतरा भी कम होगा.

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