पाकिस्तानी कब्जे वाले PoK में फिर से बड़े आंदोलन का ऐलान, इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन

New Delhi: पड़ोसी देश पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में करीब एक महीने से भीषण आंदोलन चल रहा है. इसे अब तक इतिहास का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन माना जा रहा है, जो एक बड़े आंदोलन का रूप ले चुका है. जम्मू कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने एक बार फिर से 26 और 27 जुलाई को दो दिन के बड़े आंदोलन का ऐलान किया है. इस आंदोलन का मुख्य उद्देश्य मुजफ्फराबाद तक एक ऐतिहासिक लंबा मार्च निकालना है.

अपनी मांगों को सरकार के सामने रखें

लोगों से अपील की जा रही है कि वे आंदोलन में हिस्सा लें और अपनी मांगों को शांतिपूर्ण तरीके से सरकार के सामने रखें. कार्यकर्ता उमर नजीर कश्मीरी और एडवोकेट ख्वाजा मेहरान ने लोगों से एकजुट होकर आंदोलन में शामिल होने की अपील की है. खास तौर पर डडयाल में शटर डाउन हड़ताल करने और मीरपुर डिवीजन के लोगों से बड़ी संख्या में सड़कों पर उतरने की अपील की गई है. नेताओं का कहना है कि अब तक अलग-अलग जगहों पर चल रहे धरनों को एकजुट कर शांतिपूर्ण तरीके से मुजफ्फराबाद की ओर मार्च किया जाएगा.

हर हाल में शांति और अनुशासन बनाए रखें

उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की है कि वे हर हाल में शांति और अनुशासन बनाए रखें. आंदोलनकारियों का कहना है कि उनका विरोध आम पुलिसकर्मियों या सुरक्षा बलों से नहीं, बल्कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था से है. ऐसे में वे अपने प्रदर्शन में किसी तरह का बवाल नहीं करना चाहते हैं. नई योजना के मुताबिक हजीरा और अब्बासपुर सहित कई स्थानों पर चल रहे धरनों को फिलहाल समाप्त किया जाएगा, ताकि सभी प्रदर्शनकारी एक जगह इकट्ठा होकर आंदोलन को और मजबूत बना सकें.

नमाज के बाद मार्च शुरू करेंगे

आंदोलन का पहला चरण 26 जुलाई से शुरू होगा. इस दौरान मीरपुर डिवीजन से प्रदर्शनकारियों के काफिले रवाना होकर रावलाकोट में चल रहे धरने में शामिल होंगे. इसके बाद 27 जुलाई को दोपहर की नमाज के बाद सभी प्रदर्शनकारी एक साथ मुजफ्फराबाद की ओर मार्च शुरू करेंगे. आयोजकों ने साफ कहा है कि उनका उद्देश्य किसी तरह की हिंसा या प्रशासन के साथ टकराव करना नहीं है. उनका मकसद सिर्फ प्रशासन से जवाबदेही तय कराना और लोगों को आर्थिक न्याय दिलाना है.

पूरी तरह बाजार, दुकानें बंद

एडवोकेट ख्वाजा मेहरान ने डडयाल के लोगों से 27 जुलाई को पूरी तरह बाजार, दुकानें और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां बंद रखने की अपील की है. उनका कहना है कि यह आंदोलन क्षेत्र के भविष्य के लिए एक बड़ा मोड़ साबित हो सकता है. इसलिए इसमें ज्यादा से ज्यादा लोगों को शामिल होकर अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए.

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