New Delhi: मिडिल ईस्ट में चल रहे युद्ध और तनाव के बीच रसोई गैस LPG लेकर भारतीय जहाज ग्रीन आशा सबसे खतरनाक समुद्री रास्ते स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को पार कर सुरक्षित भारत पहुंच गया है. जवाहरलाल नेहरू पोर्ट अथॉरिटी ने गुरुवार को बताया कि 15,400 टन एलपीजी लेकर आ रहा बड़ा जहाज ग्रीन आशा नवी मुंबई के पोर्ट पर सफलतापूर्वक पहुंच चुका है. ग्रीन आशा नाम का यह भारतीय जहाज सुरक्षित तरीके से अपनी मंजिल पर पहुंच गया है.
भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल मिलकर करते हैं संचालन
इस जहाज को जवाहरलाल नेहरू पोर्ट के उस विशेष हिस्से (बर्थ) पर खड़ा किया गया है, जिसका संचालन भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड और इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन मिलकर करते हैं. पश्चिम एशिया में युद्ध शुरू होने के बाद से यह इस तरह का पहला जहाज है, जो इतने खतरनाक माहौल के बावजूद वहां से निकलकर सीधे इस पोर्ट पर पहुंचा है. ऐसे में भारतीय तिरंगे वाले जहाज का वहां से सुरक्षित निकल आना यह भरोसा दिलाता है कि भविष्य में भी भारत अपनी ऊर्जा सप्लाई को इसी तरह बरकरार रखेगा.
भारत के लिए एक बड़ी जीत जैसा
अधिकारियों का कहना है कि यह भारत के लिए एक बड़ी जीत जैसा है, क्योंकि युद्ध के कारण इस रास्ते से गुजरना बहुत मुश्किल हो गया था. इस पूरे मिशन की सबसे अच्छी बात यह रही कि जहाज पर मौजूद चालक दल (क्रू) के सभी सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं. जहाज में लदी 15,400 टन एलपीजी और खुद जहाज को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.
जरूरी चीजों की सप्लाई जारी रखने में सक्षम
पोर्ट अथॉरिटी ने अपने बयान में कहा है कि ग्रीन आशा का सुरक्षित आना यह दिखाता है कि मुश्किल अंतरराष्ट्रीय हालातों और लड़ाई के बावजूद भारत अपनी समुद्री ताकत के दम पर देश के लिए जरूरी चीजों की सप्लाई जारी रखने में सक्षम है. यह जहाज भारत में रसोई गैस की कमी न हो, यह सुनिश्चित करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण था.
ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बहुत बड़ा रोल
नवा शेवा पोर्ट के नाम से मशहूर यह बंदरगाह भारत की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने में बहुत बड़ा रोल निभाता है. यहां से पूरे देश में गैस और तेल की सप्लाई की जाती है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज वह समुद्री रास्ता है जहां से दुनिया का एक बड़ा हिस्सा अपनी तेल और गैस की जरूरतें पूरी करता है, लेकिन ईरान और इजरायल के बीच चल रहे संघर्ष ने इस रास्ते को जोखिम भरा बना दिया है.
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