सीजफायर के बाद ईरान और सऊदी के विदेश मंत्रियों की पहली बातचीत, क्या खाड़ी में कम होगा तनाव?

Ved Prakash Sharma
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Saudi Iran Relations: पश्चिम एशिया से एक ऐसी खबर आई है, जो पूरी दुनिया को हैरान करने के साथ ही राहत भी दे रही है. ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में होने वाली निर्णायक शांति वार्ता से ठीक पहले सऊदी अरब और तेहरान के बीच नजदीकियां बढ़ती दिख रही हैं. यह इस बात का संकेत हैं कि खाड़ी में अब बुलेट नहीं, बल्कि बातचीत का दौर शुरू होने वाला है.

सऊदी और ईरान के विदेश मंत्रियों ने टेलीफोन पर की बातचीत

ऐसी खबर है कि सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच टेलीफोन पर एक लंबी वार्ता हुई है. दोनों नेताओं ने न केवल खाड़ी में तनाव घटाने पर चर्चा की, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने पर भी जोर दिया. पश्चिम एशिया में तनाव के बाद यह पहली बार है, जब दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई है. यह बातचीत ऐसे समय में हुई है, जब लेबनान पर इस्राइली हमलों ने कोहराम मचा रखा है. वहीं, जवाब में ईरान ने होर्मुज की घेराबंदी कर वैश्विक व्यापार को खतरे में डाल दिया है.

इस बातचीत की गहराई को समझने के लिए थोड़ा पीछे मुड़कर देखना होगा. वर्षों से ईरान और सऊदी अरब के बीच तलवारें खिंची हुई हैं. अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों को सीधे तौर पर निशाना बनाया है. ईरान ने सऊदी के तेल ठिकानों पर भी हमले किए, लेकिन इस बीच ईरान को समझ आ गया है कि उसे अपने पड़ोसियों के साथ तालमेल बिठाना ही होगा. कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ईरान अब शांति वार्ता से पहले इन क्षेत्रीय शक्तियों के साथ मिलकर एक ‘सुरक्षा कवच’ तैयार कर रहा है, जिससे अमेरिका और इस्राइल पर कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके.

पाक में होने वाली शांति वार्ता पर टिकी निगाहें

पाकिस्तान में होने वाली आगामी शांति वार्ता को गेम चेंजर माना जा रहा है. अगर सऊदी और ईरान एक साझा स्टैंड पर सहमत हो जाते हैं, तो पश्चिम एशिया में युद्धविराम की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी. हालांकि, इस बीच इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ उनके हमले रुकने वाले नहीं हैं. उन्होंने कहा कि इस्राइली सेना पूरी ताकत और सटीक रणनीति के साथ हिजबुल्लाह को निशाना बना रही है. जब तक उत्तरी इस्राइल के निवासी अपने घरों में सुरक्षित वापस नहीं लौट जाते, तब तक हिजबुल्लाह के ठिकानों पर जहां भी जरूरी होगा, हमला जारी रहेगा. नेतन्याहू के बयान ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर से तनाव बढ़ा दिया है.

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