UPI Charge: यूपीआई के जरिए होने वाले बड़े भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी एमडीआर लागू किए जाने को लेकर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है. केंद्रीय बैंक का कहना है कि ज्यादा वैल्यू वाले यूपीआई ट्रांजेक्शन पर एमडीआर लागू होना देश के डिजिटल पेमेंट सिस्टम को लंबे समय तक मजबूत और टिकाऊ बनाए रखने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. आरबीआई के मुताबिक, इससे यूपीआई के लिए नई सुविधाएं विकसित करने, तकनीक और बुनियादी ढांचे में निवेश जारी रखने और देशभर में डिजिटल भुगतान का दायरा बढ़ाने में मदद मिल सकती है.
आरबीआई ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जारी बयान में कहा कि पेमेंट इकोसिस्टम से जुड़े अलग-अलग पक्षों के बीच एमडीआर का उचित बंटवारा जरूरी है. इससे तकनीक, इंफ्रास्ट्रक्चर और भुगतान स्वीकार करने वाले नेटवर्क में लगातार निवेश को बढ़ावा मिलेगा. इसके जरिए यूपीआई को ज्यादा जगहों पर पहुंचाने, नए ग्राहकों को जोड़ने और लेनदेन की संख्या में आगे भी बढ़ोतरी करने में मदद मिलेगी.
यूपीआई से व्यक्ति को पैसे भेजना रहेगा पूरी तरह मुफ्त
नए ढांचे को लेकर सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पर्सन-टू-पर्सन यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को किए जाने वाले यूपीआई भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा. चाहे भुगतान की रकम कितनी भी हो, पी2पी यूपीआई ट्रांजेक्शन उपयोगकर्ताओं के लिए मुफ्त रहेगा. वित्त मंत्रालय ने मंगलवार को जारी स्पष्टीकरण में भी साफ किया कि नए यूपीआई फ्रेमवर्क का पर्सन-टू-पर्सन लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ेगा. यानी किसी व्यक्ति को दूसरे व्यक्ति के बैंक खाते में यूपीआई के जरिए पैसा भेजने पर किसी तरह का एमडीआर नहीं देना होगा.
2 हजार रुपये से ज्यादा के मर्चेंट भुगतान पर लग सकता है एमडीआर
मर्चेंट यानी दुकानदार को किए जाने वाले पर्सन-टू-मर्चेंट (पी2एम) भुगतान के मामले में नियम अलग होगा. 2,000 रुपये से कम के पी2एम यूपीआई ट्रांजेक्शन मुफ्त रहेंगे, जबकि 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर मर्चेंट के स्तर पर एमडीआर लगाया जा सकता है. इस व्यवस्था में 0.4 प्रतिशत का एमडीआर 2,000 रुपये से ज्यादा के पी2एम ट्रांजेक्शन पर लागू होगा. यह शुल्क सीधे सरकार या एनपीसीआई द्वारा वसूला जाने वाला चार्ज नहीं है.
एमडीआर टैक्स नहीं, पेमेंट इकोसिस्टम में होगा बंटवारा
वित्त मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि एमडीआर को किसी तरह का टैक्स नहीं माना जाना चाहिए. यह सरकार या एनपीसीआई की ओर से वसूला जाने वाला शुल्क भी नहीं है. एमडीआर की रकम पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों के बीच बांटी जाएगी. इसमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और यूपीआई एप्लीकेशन प्रोवाइडर जैसे पक्ष शामिल हैं. इसका उद्देश्य यूपीआई के संचालन और उसके लगातार विस्तार से जुड़ी लागत और निवेश को सपोर्ट करना है.
75 हजार रुपये या उससे ज्यादा के भुगतान पर अधिकतम 300 रुपये
नए प्रावधान के तहत 2,000 रुपये से अधिक के सामान्य पी2एम ट्रांजेक्शन पर 0.4 प्रतिशत एमडीआर लगाया जा सकता है. हालांकि, 75,000 रुपये या उससे ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर एमडीआर की अधिकतम सीमा 300 रुपये प्रति लेनदेन रखी गई है. इसका मतलब यह है कि भुगतान की रकम बढ़ने के बावजूद इस श्रेणी में एमडीआर 300 रुपये से ज्यादा नहीं होगा.
रेलवे, टेलीकॉम, बीमा और ईंधन जैसे क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था
जरूरी सेवाओं और कम मार्जिन पर काम करने वाले कुछ क्षेत्रों के लिए एमडीआर की अलग व्यवस्था रखी गई है. रेलवे, टेलीकॉम, इंश्योरेंस, फ्यूल और खेती से जुड़े सामान जैसे क्षेत्रों में 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजेक्शन पर 5 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का फ्लैट एमडीआर लागू होगा. इस व्यवस्था का उद्देश्य जरूरी सार्वजनिक सेवाओं और कम मार्जिन वाले कारोबारों के लिए भुगतान से जुड़ी लागत को एक निश्चित स्तर पर रखना है.
सुरक्षित और आसान यूपीआई व्यवस्था बनाए रखने पर जोर
आरबीआई ने कहा है कि वह यूपीआई को सुरक्षित, आसान, सस्ता और सभी लोगों की पहुंच में बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है. केंद्रीय बैंक के मुताबिक, डिजिटल भुगतान व्यवस्था में उचित लागत संरचना के साथ भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम की लंबी अवधि की स्थिरता और विकास को भी बढ़ावा दिया जा सकेगा.
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