दशहरा-दिवाली से पहले महंगी हो सकती है Flight, ATF के दाम में लगातार तीसरे महीने बढ़ोतरी

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

ATF Price Hike: त्योहारी सीजन में अगर आप हवाई सफर करने की तैयारी कर रहे हैं तो आपके लिए यह खबर अहम है. घरेलू एयरलाइंस के लिए हवाई ईंधन यानी ATF लगातार तीसरे महीने महंगा हो गया है. अक्टूबर में ATF की कीमत में 13.22 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है. यानी एक लीटर ATF अब करीब 16 रुपये महंगा हो गया है. पहले इसकी कीमत 121.28 रुपये प्रति लीटर थी, जो अब बढ़कर करीब 137 रुपये प्रति लीटर हो गई है. अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ईंधन की इस बढ़ी हुई कीमत का असर हवाई टिकट के किराए पर कितना पड़ेगा. क्योंकि अक्टूबर और नवंबर में दशहरा, दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहार हैं, इस दौरान हवाई यात्रा की मांग पहले से ही बढ़ जाती है.

तीन महीने में करीब 27 रुपये महंगा हुआ ATF

पिछले तीन महीनों में ATF की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिली है. जुलाई में घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF की कीमत 5 रुपये घटाकर 110 रुपये प्रति लीटर कर दी गई थी. इसके बाद अगस्त में इसमें 5 रुपये की बढ़ोतरी हुई और कीमत 115 रुपये प्रति लीटर पहुंच गई. सितंबर में ATF के दाम में 6.28 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की गई, जिसके बाद इसकी कीमत 121.28 रुपये हो गई. अब अक्टूबर में करीब 16 रुपये की बढ़ोतरी के बाद ATF करीब 137 रुपये प्रति लीटर हो गया है. यानी सिर्फ तीन महीनों के दौरान हवाई ईंधन करीब 27 रुपये प्रति लीटर महंगा हो चुका है.

ATF क्या है और इतना जरूरी क्यों है?

ATF यानी Aviation Turbine Fuel वह ईंधन है, जिसका इस्तेमाल हवाई जहाज उड़ाने के लिए किया जाता है. जिस तरह सड़क पर चलने वाली गाड़ियों के लिए पेट्रोल और डीजल जरूरी है, उसी तरह विमानों के संचालन के लिए ATF जरूरी होता है. यही वजह है कि ATF की कीमत में होने वाला कोई भी बदलाव एयरलाइंस के परिचालन खर्च पर सीधा असर डालता है.

एयरलाइंस के खर्च में ईंधन की बड़ी हिस्सेदारी

एक एयरलाइन को विमान संचालित करने के लिए पायलट और क्रू की सैलरी, विमान का किराया, मेंटेनेंस, एयरपोर्ट चार्ज और ईंधन समेत कई तरह के खर्च उठाने पड़ते हैं. इनमें ईंधन का हिस्सा सबसे बड़ा होता है. भारत में एयरलाइन के कुल परिचालन खर्च में ATF की हिस्सेदारी करीब 35 से 40 फीसदी तक बताई जाती है. ऐसे में जब हवाई ईंधन महंगा होता है तो एयरलाइंस की लागत भी बढ़ जाती है.

एक उड़ान का खर्च कितना बढ़ सकता है?

इसे एक अनुमान से समझ सकते हैं. दिल्ली से मुंबई जैसी करीब दो घंटे की उड़ान में एयरबस A320 जैसा विमान लगभग 5,000 से 6,000 लीटर ईंधन खर्च कर सकता है. अगर ATF की कीमत में प्रति लीटर 16 रुपये की बढ़ोतरी मानें, तो सिर्फ ईंधन की वजह से एक उड़ान का खर्च करीब 80,000 से 96,000 रुपये तक बढ़ सकता है.

ऐसे विमान में करीब 180 सीटें होती हैं. अगर किसी उड़ान में करीब 150 यात्री सफर कर रहे हों, तो प्रति यात्री अतिरिक्त ईंधन लागत करीब 500 से 650 रुपये तक बैठ सकती है. हालांकि, यह केवल एक मोटा अनुमान है. वास्तविक खर्च विमान के मॉडल, रूट, मौसम और यात्रियों की संख्या के आधार पर अलग-अलग हो सकता है. लंबी दूरी की उड़ानों में इसका असर और ज्यादा हो सकता है.

यात्रियों तक कैसे पहुंच सकता है बढ़े खर्च का बोझ?

ATF महंगा होने के बाद एयरलाइंस के सामने बढ़ी हुई लागत को संभालने के कई विकल्प होते हैं. इसका एक तरीका बेस फेयर यानी मूल किराए में बढ़ोतरी करना है. दूसरा तरीका टिकट पर अलग से फ्यूल चार्ज लगाना हो सकता है. इसके अलावा एयरलाइंस कम कीमत वाली सीटों की उपलब्धता घटाकर भी औसत किराए को बढ़ा सकती हैं. ऐसा पहले भी देखने को मिल चुका है. साल 2023 में ATF की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी के दौरान IndiGo ने 6 अक्टूबर 2023 से दूरी के हिसाब से टिकट पर 300 रुपये से 1,000 रुपये तक का फ्यूल चार्ज लगाया था.

हालांकि, इस बार अभी तक किसी एयरलाइन ने किराया बढ़ाने या फ्यूल चार्ज लगाने का ऐलान नहीं किया है. यह भी जरूरी नहीं है कि ATF जितने फीसदी महंगा हुआ है, हवाई किराया भी उसी अनुपात में बढ़ जाए. एयरलाइंस किराया तय करते समय बाजार में प्रतिस्पर्धा और यात्रियों की मांग समेत कई दूसरे कारकों को भी ध्यान में रखती हैं.

त्योहारों में बढ़ सकती है यात्रियों की परेशानी

अक्टूबर और नवंबर में दशहरा, दुर्गा पूजा, दिवाली और छठ जैसे बड़े त्योहार पड़ते हैं. इस दौरान बड़ी संख्या में लोग अपने घर जाने और परिवार के साथ त्योहार मनाने के लिए हवाई यात्रा करते हैं. त्योहारों के दौरान मांग बढ़ने की वजह से हवाई किराए सामान्य दिनों की तुलना में पहले ही ज्यादा हो जाते हैं.

ऐसे में अगर ईंधन की बढ़ी लागत का असर टिकट की कीमतों पर आता है, तो यात्रियों पर दोहरा दबाव पड़ सकता है. खासकर पटना, लखनऊ, कोलकाता और गुवाहाटी जैसे रूट पर त्योहारों के दौरान यात्रियों की संख्या ज्यादा रहती है, इसलिए इन रूट पर किराए में बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है.

आखिर क्यों बढ़ रहे हैं ATF के दाम?

इस साल की शुरुआत में पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और जेट फ्यूल की कीमतों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला है. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में होने वाले बदलाव का असर घरेलू ईंधन कीमतों पर भी पड़ता है. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति भी ईंधन की लागत को प्रभावित करती है.

इसी तरह के उतार-चढ़ाव को देखते हुए इस साल घरेलू एयरलाइंस के लिए ATF की कीमत एक तय राष्ट्रीय रेट पर जारी की जा रही है. अप्रैल में सरकार ने घरेलू उड़ानों के लिए ATF की कीमत में बढ़ोतरी को सीमित करने का फैसला किया था. एयर इंडिया, IndiGo और Akasa जैसी एयरलाइंस ने इस कदम का स्वागत किया था. हालांकि, पिछले तीन महीनों में लगातार हुई बढ़ोतरी ने एयरलाइंस की लागत को लेकर चिंता फिर बढ़ा दी है.

ATF पर टैक्स का भी बोझ

ATF पर केंद्र सरकार एक्साइज ड्यूटी भी लगाती है. ईंधन की कीमत बढ़ने पर टैक्स का बोझ भी बढ़ सकता है. एयरलाइंस लंबे समय से ATF को GST के दायरे में लाने की मांग करती रही हैं, ताकि टैक्स का बोझ कम किया जा सके.

हवाई टिकट बुक करने वालों के लिए क्या जरूरी है?

जो लोग त्योहारों के दौरान हवाई यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए आखिरी समय तक टिकट टालना महंगा पड़ सकता है. इसलिए संभव हो तो यात्रा की तारीख पहले तय करके टिकट बुक करना बेहतर रहता है. अलग-अलग एयरलाइंस और तारीखों के किराए की तुलना करने से भी कम कीमत वाला विकल्प मिल सकता है. अगर यात्रा की तारीख में थोड़ी गुंजाइश है, तो सप्ताह के बीच के दिनों में उड़ान लेने पर कई बार किराया कम मिल सकता है.

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