8th Pay Commission: अगर आप केंद्र सरकार के रिटायर्ड कर्मचारी हैं और आपको उसी पद से रिटायर हुए किसी दूसरे कर्मचारी से कम पेंशन मिल रही है, तो अब इस अंतर को लेकर अपनी बात 8वें वेतन आयोग के सामने रख सकते हैं. कर्मचारी और पेंशनर संगठनों ने आयोग के सामने सिविलियन पेंशनर्स के लिए भी सेना की तर्ज पर ‘वन रैंक, वन पेंशन’ यानी OROP व्यवस्था लागू करने की मांग रखी है. इस मांग को लेकर अक्टूबर में बेंगलुरु और मुंबई में होने वाली 8वें वेतन आयोग की अहम बैठकों में चर्चा होने की उम्मीद है. इन बैठकों में फिटमेंट फैक्टर के साथ-साथ केंद्र सरकार के सिविलियन कर्मचारियों के लिए OROP जैसी व्यवस्था लागू करने की मांग भी प्रमुख मुद्दों में शामिल रहेगी.
क्यों उठ रही है OROP की मांग?
लेवल 1 से 18 तक के केंद्र सरकार के सिविलियन कर्मचारी और पेंशनर संगठन लंबे समय से पेंशन में समानता की मांग उठा रहे हैं. उनका तर्क है कि अगर दो कर्मचारी एक ही पद और एक ही लेवल पर काम करते हैं और उनकी सेवा अवधि भी लगभग समान है, तो सिर्फ अलग-अलग समय पर रिटायर होने की वजह से उनकी पेंशन में बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए. मौजूदा व्यवस्था में एक ही पद पर समान अवधि तक सेवा करने वाले दो कर्मचारी अगर अलग-अलग वर्षों में रिटायर होते हैं, तो उनकी पेंशन अलग हो सकती है.
ऐसे में हाल में रिटायर हुए कर्मचारी को कई मामलों में पहले रिटायर हुए कर्मचारी की तुलना में ज्यादा पेंशन मिलती है, भले ही दोनों का पद और सेवा अवधि समान रही हो. पेंशनर संगठनों का कहना है कि इसी अंतर को खत्म करने के लिए सिविलियन कर्मचारियों के लिए भी OROP जैसी व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए.
क्या है ‘वन रैंक, वन पेंशन’?
OROP यानी ‘वन रैंक, वन पेंशन’ का मतलब है कि समान रैंक और समान अवधि तक सेवा करने वाले कर्मचारियों को उनके रिटायरमेंट की तारीख अलग होने के बावजूद समान पेंशन मिले. मौजूदा मांग का मुख्य आधार यही है कि एक ही पद और समान सेवा अवधि वाले कर्मचारियों के बीच सिर्फ रिटायरमेंट के साल के आधार पर पेंशन का बड़ा अंतर नहीं होना चाहिए.
सशस्त्र बलों की तर्ज पर समानता की मांग
केंद्र सरकार ने साल 2015 में सशस्त्र बलों के लिए OROP व्यवस्था लागू की थी. इसके तहत समान रैंक और समान अवधि तक सेवा करने वाले सैनिकों के लिए पेंशन में समानता सुनिश्चित करने की व्यवस्था की गई. अब इसी तर्ज पर सिविलियन पेंशनर्स भी अपने लिए ऐसी ही व्यवस्था की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि अगर सशस्त्र बलों और सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के रिटायर्ड जजों के लिए पेंशन में समानता से जुड़ी व्यवस्थाएं मौजूद हैं, तो केंद्र सरकार के सिविलियन पेंशनर्स के लिए भी लेवल 1 से 18 तक ऐसी व्यवस्था पर विचार किया जाना चाहिए.
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