अब भारत में हाई-एंड मशीनरी बनाने की तैयारी, चीन पर निर्भरता होगी कम, बजट में ₹23,000 करोड़ का इंसेंटिव प्लान

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New Delhi: भारत अब आयात पर निर्भरता को कम करना चाहता है. माना जा रहा है कि घरेलू उत्पादन को बढ़ाने और चीन जैसे देशों पर निर्भरता घटाने के लिए सरकार बजट 2026 में बड़ा ऐलान कर सकती है. हाई-टेक कैपिटल गुड्स के स्थानीय निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए सरकार करीब ₹23,000 करोड़ का इंसेंटिव पैकेज ला सकती है. इस योजना का मकसद आयात पर निर्भरता कम करना और देश में मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को मजबूत करना है.

भारत को बनाना है हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र

सरकार का लक्ष्य उद्योग साझेदारी के जरिए सप्लाई चेन को मजबूत करना और भारत को हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र बनाना है. अधिकारियों के मुताबिक कंस्ट्रक्शन इक्विपमेंट सेक्टर के लिए ₹14,000 से ₹16,000 करोड़ का प्रोत्साहन कार्यक्रम अंतिम चरण में है. इसके अलावा ऑटोमोबाइल सेक्टर में मजबूत ग्लोबल वैल्यू चेन (GVC) तैयार establishes करने के लिए ₹7,000 करोड़ की अलग योजना पर भी काम चल रहा है.

भारत के कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट प्रभावित

निर्माण उपकरण पैकेज का मुख्य उद्देश्य टनल बोरिंग मशीन, क्रेन और अन्य हाई-एंड मशीनरी का देश में ही निर्माण बढ़ाना है. फिलहाल इस सेक्टर के करीब आधे पुर्जे चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी से आयात किए जाते हैं. चीन द्वारा पहले TBM के निर्यात पर लगाए गए प्रतिबंधों के कारण भारत के कई इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट प्रभावित हुए थे. हालांकि बाद में ये प्रतिबंध हटा लिए गए.

इससे पूरी तरह तैयार मशीनों के आयात में आएगी बड़ी कमी

इस योजना के तहत हाइड्रोलिक्स, अंडरकैरिज, इलेक्ट्रॉनिक कंट्रोल यूनिट, सेंसर और टेलीमैटिक्स जैसे हाई-टेक कंपोनेंट्स के घरेलू उत्पादन को बढ़ावा दिया जाएगा. सरकार को उम्मीद है कि इससे पूरी तरह तैयार मशीनों के आयात में बड़ी कमी आएगी. ऑटो सेक्टर को फायदा मिलेगा. ऑटोमोबाइल के लिए प्रस्तावित GVC योजना का फोकस एडवांस्ड कार टेक्नोलॉजी पर होगा. जैसे एडवांस्ड ड्राइवर असिस्टेंस सिस्टम, 360 डिग्री कैमरा सेंसर और स्मार्ट इलेक्ट्रॉनिक्स.

निर्यात के नए अवसर भी हो सकते हैं पैदा

इन कंपोनेंट्स में कम से कम 50% डोमेस्टिक वैल्यू एडीशन के साथ मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे निर्यात के नए अवसर भी पैदा हो सकते हैं. नई योजना में ऑटो पार्ट्स निर्माण के लिए इस्तेमाल होने वाले मोल्ड्स, पावर टूल्स और कैपिटल गुड्स की खरीद पर सब्सिडी मिलने की संभावना है. इसके साथ ही प्रोटोटाइपिंग सेंटर स्थापित करने पर भी जोर होगा ताकि उत्पादन से पहले परीक्षण और इनोवेशन को बढ़ावा मिल सके.

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