Dhaka: बांग्लादेश में सरकार जरूर बदली लेकिन अल्पसंख्यकों पर होने वाले हमलों में कोई कमी नहीं आई है. अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हिंसा की घटनाओं में तेजी से बढ़ोतरी हुई है. अल्पसंख्यकी परिषद की रिपोर्ट में खुलासा हुआ है. पूरे देश में साल 2026 के पहले छह महीनों में देशभर में सांप्रदायिक हिंसा की 257 घटनाएं दर्ज की गईं. इन घटनाओं में 44 लोगों की जान चली गई, जबकि कई लोग घायल हुए. इसमें बड़ी संख्या में परिवारों पर असर डाला हैं.
आंकड़े प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी
ये आंकड़े ढाका के नेशनल प्रेस क्लब में परिषद के कार्यवाहक महासचिव मोनिंद्र कुमार नाथ ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में जारी किए. परिषद ने भगवान राम की 81 फुट ऊंची प्रतिमा बनाने का प्रस्ताव रखने वाले हरिदास चंद्र तरणी दास की गिरफ्तारी पर भी चिंता जताई. इसे धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया गया है. साथ ही नवंबर 2024 से जेल में बंद हिंदू नेता चिन्मय कृष्ण दास की रिहाई की मांग दोहराई.
अल्पसंख्यकों पर हमलों जैसी कई गंभीर घटनाएं
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद की नई रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी से जून 2026 के बीच अल्पसंख्यकों पर हमलों जैसी कई गंभीर घटनाएं सामने आईं हैं. इसमें हत्या, मारपीट, महिलाओं के खिलाफ हिंसा, अपहरण, जबरन जमीन कब्जाने और धार्मिक स्थानों पर हमले जैसे मामले शामिल हैं. परिषद ने बताया कि 40 मामलों में 44 लोगों की मौत हुई. महिलाओं के खिलाफ हिंसा के 5 मामले दर्ज किए गए. इनमें रेप और गैंगरेप जैसी घटनाएं भी शामिल हैं.
यातना के 10 मामले भी सामने आए
इसके अलावा अपहरण, जबरन वसूली और यातना के 10 मामले भी सामने आए. रिपोर्ट में दावा है कि अल्पसंख्यकों पर हमले और धमकियों के 42 मामले दर्ज किए गए. वहीं 62 मामलों में धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया गया. इन स्थलों में मूर्तियां तोड़ी गईं. लूटपाट हुई और आगजनी की घटनाएं हुईं. इसके अलावा धार्मिक संस्थानों की जमीन पर कब्जे या कब्जे की कोशिश के 15 मामले सामने आए. वहीं घरों और दुकानों पर हमले, तोड़फोड़, लूट और आगजनी की 47 घटनाएं दर्ज की गईं.
ईशनिंदा के आरोपों में गिरफ्तारी और उत्पीड़न के 9 मामले
परिषद ने बताया कि ईशनिंदा के आरोपों में गिरफ्तारी और उत्पीड़न के 9 मामले सामने आए. वहीं घरों, जमीन और व्यावसायिक संपत्तियों पर जबरन कब्जे के 21 मामले दर्ज किए गए. इसके अलावा सांप्रदायिक हिंसा से जुड़ी 6 अन्य घटनाओं का जिक्र भी किया गया है. परिषद का कहना है कि 2025 और 2026 के पहले छह महीनों में हिंसा का पैटर्न लगभग एक जैसा रहा. लेकिन 2026 में हत्याओं, धार्मिक स्थलों पर हमलों, आगजनी, लूटपाट और जमीन कब्जाने की घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई.
कई परिवारों के रोजगार पर असर
रिपोर्ट की मानें तो अगस्त 2024 से जून 2026 के बीच अल्पसंख्यकों के घरों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को प्रभावित करने वाली 2055 घटनाएं दर्ज की गईं. इन हमलों की वजह से कई परिवारों के रोजगार पर असर पड़ा. उन्हें लंबे समय तक आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ा. परिषद का कहना है कि लगातार बढ़ रही हिंसा के कारण अल्पसंख्यक समुदायों में डर और असुरक्षा की भावना बढ़ी है. कई लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा. अलग-अलग समुदायों के बीच भरोसा भी कमजोर हुआ है.
जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की मांग
मानवाधिकार संगठन ने बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यक और आदिवासी समुदायों को अत्यंत संवेदनशील समूह घोषित किया है. उनकी सुरक्षा मजबूत करने और सांप्रदायिक हिंसा के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाने की मांग की है.
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