कोरिया मास्टर्स में अश्मिता चालिहा ने रचा इतिहास, चीनी खिलाड़ी हान को हराकर पहली बार जीता BWF टूर खिताब

New Delhi: भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी अश्मिता चालिहा ने शानदार वापसी करते हुए रविवार को कोरिया मास्टर्स सुपर 300 महिला सिंगल्स का खिताब अपने नाम कर लिया. फाइनल में अस्मिता ने चीन की हान कियान शी को 14-21, 21-14, 21-14 से हराया. 53 मिनट तक चले मुकाबले में भारतीय खिलाड़ी ने पहला गेम गंवाने के बाद जबरदस्त वापसी की और लगातार दो गेम जीतकर अपने करियर का पहला बीडब्ल्यूएफ खिताब हासिल किया.

लगातार दूसरे सप्ताह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीता

कोरिया मास्टर्स की जीत के साथ ही भारतीय खिलाड़ियों ने लगातार दूसरे सप्ताह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर खिताब जीता है. इससे पहले तन्वी शर्मा ने पिछले रविवार ताइपे ओपन का खिताब अपने नाम किया था. फाइनल की शुरुआत अस्मिता के लिए अच्छी नहीं रही. वह पहले गेम में अपनी लय हासिल करने के लिए संघर्ष करती नजर आईं. हान कियान शी ने इसका फायदा उठाते हुए शुरुआत से ही मुकाबले पर पकड़ बनाई और पहला गेम 21-14 से अपने नाम कर लिया.

अस्मिता ने अपने खेल की गति और आक्रामकता बढ़ाई

एक गेम से पिछड़ने के बाद अस्मिता ने अपने खेल की गति और आक्रामकता बढ़ाई. भारतीय खिलाड़ी ने दूसरे गेम में लगातार आक्रामक शॉट लगाए और चीनी खिलाड़ी को दबाव में रखा. अस्मिता ने दूसरा गेम भी 21-14 से जीतकर मुकाबले को निर्णायक गेम में पहुंचा दिया. तीसरे गेम की शुरुआत में दोनों खिलाड़ियों के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली. दोनों लगातार अंक हासिल करती रहीं और मुकाबला बेहद करीबी रहा.

धीरे-धीरे मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली

हालांकि, मध्यांतर के बाद अस्मिता ने धीरे-धीरे मैच पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली. उन्होंने 12-11 की बढ़त बनाने के बाद एक सटीक विनर लगाया. इसके बाद कोर्ट के बाहर जाते हुए बेहद मुश्किल शॉट को भी अस्मिता ने अंदर रखने में सफलता हासिल की और अपनी बढ़त 15-11 कर ली. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा. अस्मिता ने शानदार क्रॉस-कोर्ट विनर के जरिए स्कोर 19-14 किया.

जीत के बेहद करीब पहुंच गईं

अगले रिटर्न पर हान की शटल बाहर चली गई और भारतीय खिलाड़ी जीत के बेहद करीब पहुंच गईं. आखिरकार अस्मिता ने 21-14 से तीसरा गेम जीतकर खिताब अपने नाम कर लिया. कोरिया मास्टर्स की यह जीत अस्मिता चलिहा के करियर की अब तक की सबसे बड़ी उपलब्धि है. यह बीडब्ल्यूएफ वर्ल्ड टूर के सुपर 300 स्तर पर उनका पहला खिताब भी है.

अस्मिता ने मुकाबले में वापसी की

पहला गेम हारने के बाद जिस तरह अस्मिता ने मुकाबले में वापसी की, वह उनकी मानसिक मजबूती और दबाव में बेहतर प्रदर्शन करने की क्षमता को दिखाता है. निर्णायक गेम में भी करीबी मुकाबले के बीच उन्होंने अपना संयम बनाए रखा और अहम मौकों पर आक्रामक खेल दिखाकर इतिहास रच दिया.

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