‘हमें बेरहमी से मार रहा पाकिस्तान’… बलूचों ने ट्रंप-शी से लगाई मदद की गुहार, सैन्य मदद रोकने की मांग

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
Balochistan: पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आज़ादी की मांग कर रहे “रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान” ने अमेरिका और चीन से पाकिस्तान को दी जा रही सैन्य सहायता और आर्थिक मदद को रोकने की अपील की है. संगठन ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को संबोधित एक खुले संयुक्त पत्र में यह मांग रखी है, जिसमें पाकिस्तान पर बलूचिस्तान में सैन्य कार्रवाई और आम नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया गया है.
पत्र के अनुसार, हाल ही में बलूचिस्तान के सुराब इलाके में पाकिस्तान की ओर से हवाई हमले किए गए, जिनमें महिलाओं और बच्चों समेत 30 निर्दोष बलूच नागरिक मारे गए, लेकिन पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान ने इन हवाई हमलों से इनकार कर दुनिया के सामने गलत जानकारी पेश की.

अमेरिकी सरकार को गुमराह कर रही सरकार

पत्र में कहा गया है कि पाकिस्तान के सैन्य प्रतिष्ठान पर पहले भी अमेरिका की सरकारों को गुमराह करने का आरोप लगता रहा है. साथ ही जॉर्ज डब्ल्यू. बुश, बराक ओबामा और डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन का जिक्र करते हुए पत्र में कहा  गया कि पाकिस्तान ने ओसामा बिन लादेन की मौजूदगी और उसकी गतिविधियों को लेकर भी अमेरिका को गुमराह किया था.
इतना ही नहीं, रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने चीन को लेकर भी पाकिस्तान पर स्थिति छिपाने का आरोप लगाया है. पत्र में कहा गया है कि पाकिस्तान चीन को बलूचिस्तान की स्थिति और चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे यानी CPEC की वास्तविक स्थिति के बारे में गुमराह कर रहा है. संगठन ने कहा है कि बलूचिस्तान में शाम 6 बजे के बाद पाकिस्तान की सेना सड़क के रास्ते यात्रा करने में सक्षम नहीं है और पाकिस्तान ने पूरे बलूचिस्तान में जमीन पर अपना नियंत्रण खो दिया है.

अमेरिका से F-16 की मदद पर सवाल

वहीं, अमेरिका से पाकिस्तान को दी गई सैन्य सहायता का भी जिक्र किया गया है. रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान के अनुसार, अमेरिका ने 1983 से 1987 के बीच Peace Gate I और II कार्यक्रमों के तहत पाकिस्तान को 40 F-16A/B लड़ाकू विमान दिए थे. पत्र के मुताबिक, 2006 में अमेरिका ने पाकिस्तान के लिए एक और पैकेज को मंजूरी दी थी. इसमें 18 F-16C/D Block 52 विमान, 34 पुराने F-16 विमानों का MLU कार्यक्रम के तहत आधुनिकीकरण, AIM-120C मिसाइलें तथा रखरखाव, तकनीकी और इंजन सहायता शामिल थी. पत्र में इस व्यापक पैकेज की कीमत करीब 5 अरब डॉलर बताई गई है.
ऐॅसे में रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने अमेरिका से अपील की है कि इन सैन्य क्षमताओं का इस्तेमाल बलूच नागरिकों के खिलाफ नहीं होना चाहिए. पत्र में अमेरिकी प्रशासन से पाकिस्तान को दी जाने वाली लंबे समय से चली आ रही सैन्य सहायता पर दोबारा विचार करने की मांग की गई है.

सैन्य सहायता रोकने और बलूचिस्तान को मान्यता देने की अपील

रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने अमेरिका और चीन से ऐसी सैन्य सहायता रोकने की मांग की है, जिससे उसके अनुसार बलूच नागरिकों के खिलाफ उल्लंघनों में मदद मिल सकती है. साथ ही उसने हथियारों और विमानों के इस्तेमाल की निगरानी के लिए पारदर्शी व्यवस्था बनाने की अपील की है, ताकि उनका इस्तेमाल नागरिक आबादी और बलूचिस्तान के मुक्ति आंदोलन को दबाने के लिए न हो.
वहीं, पत्र के अंत में अंतरराष्ट्रीय समुदाय और बलूचिस्तान के पड़ोसी देशों से बलूचिस्तान को एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में औपचारिक मान्यता देने की अपील की गई है. रिपब्लिक ऑफ बलूचिस्तान ने कहा है कि दूसरे देशों को बलूच लोगों के साथ राजनीतिक बातचीत, आपसी सम्मान, आर्थिक साझेदारी और अंतरराष्ट्रीय कानून के सिद्धांतों के आधार पर व्यापार, निवेश, रक्षा और अन्य संबंध स्थापित करने चाहिए, न कि पाकिस्तान को सैन्य सहायता देकर.
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