‘पाकिस्तान के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाना गंभीर खतरा’, बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट राशिद ने दी चेतावनी

Islamabad: बांग्लादेश में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ एडवोकेट मोहसेन राशिद ने पाकिस्तान को लेकर बडा बयान दिया है. राशिद ने कहा है कि  बांग्लादेश को पाकिस्तान के साथ तब तक राजनयिक और दूसरे सभी तरह के संबंध खत्म कर देने चाहिए, जब तक इस्लामाबाद में लोकतंत्र बहाल नहीं हो जाता. उन्होंने चेतावनी दी कि पाकिस्तान के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने से बांग्लादेश के लिए गंभीर रणनीतिक और राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम पैदा हो सकते हैं.

शेख हसीना की संभावित वापसी पर विस्तार से बात

बांग्लादेश के न्यूज़ पोर्टल ब्लिट्ज को दिए एक विशेष इंटरव्यू में राशिद ने बांग्लादेश में जारी भीड़ हिंसा, पुलिस और सशस्त्र बलों के भीतर घटते भरोसे, मुकदमों का सामना कर रहे सैन्य अधिकारियों के साथ हो रहे व्यवहार और भारत से पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना की दिसंबर में संभावित वापसी पर विस्तार से बात की. राशिद ने कहा कि बांग्लादेश में जारी सुरक्षा और राजनीतिक अस्थिरता का समाधान तब तक नहीं हो सकता, जब तक कानून लागू करने वाली संस्थाओं पर लोगों का भरोसा बहाल नहीं किया जाता.

पुलिस का भरोसा कमजोर हुआ

2024 के राजनीतिक उथल-पुथल के बाद जारी भीड़ हिंसा पर बात करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस का भरोसा कमजोर हुआ है, क्योंकि अशांति के दौरान पुलिसकर्मियों पर हमले हुए और उनकी हत्या की गई. उनके मुताबिक, इन घटनाओं की पर्याप्त जांच नहीं होने से पुलिस का मनोबल और कमजोर हुआ है. राशिद ने कहा कि राज्य को कानून लागू करने वाली संस्थाओं का अधिकार और सम्मान बहाल करना चाहिए. साथ ही वास्तविक गलतियों और दुर्व्यवहार के मामलों में जवाबदेही भी तय होनी चाहिए.

बार-बार किए गए बदलावों की भी आलोचना

उन्होंने पुलिस की वर्दी और संस्थागत ढांचे में बार-बार किए गए बदलावों की भी आलोचना की. उनका कहना था कि केवल ऐसे बदलावों से सुरक्षा संस्थाओं के मूल चरित्र या पेशेवर क्षमता में सुधार नहीं होता. राशिद ने उन सशस्त्र बलों के सदस्यों के साथ हो रहे व्यवहार की भी कड़ी आलोचना की, जिनके खिलाफ 2024 की अशांति के दौरान उनके आचरण को लेकर कानूनी कार्रवाई की गई है. उन्होंने कहा कि सैन्यकर्मी एक सख्त कमांड सिस्टम के तहत काम करते हैं. उनके अनुसार, सैनिकों से एक तरफ कानूनी आदेशों का पालन करने की उम्मीद नहीं की जा सकती और दूसरी तरफ अपने निर्धारित कर्तव्यों को निभाने के लिए बाद में उन्हें सामान्य अपराधियों की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.

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