बांग्लादेश में 13वें संसदीय चुनाव की तारीख जैसे-जैसे नजदीक आ रही है, देश का सियासी माहौल और गर्म होता जा रहा है. 12 फरवरी को होने वाले चुनाव को लेकर राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं, लेकिन इसी बीच देशभर में हिंसा की घटनाएं भी तेजी से बढ़ी हैं, जिससे आम लोगों की चिंता बढ़ गई है. बांग्लादेश चुनाव आयोग ने 11 दिसंबर 2025 को चुनाव की तारीख का ऐलान किया था. इसके तुरंत बाद ढाका में इंकलाब मंच के प्रवक्ता शरीफ उस्मान बिन हादी की दिनदहाड़े हत्या कर दी गई, जिसके बाद राजनीतिक हत्याओं का सिलसिला शुरू हो गया.
चुनावी हिंसा में मौतें और सैकड़ों घायल
बांग्लादेशी मीडिया ढाका ट्रिब्यून ने सरकारी सूत्रों के हवाले से बताया कि शेड्यूल जारी होने के बाद से चुनाव से जुड़ी घटनाओं में चार लोगों की मौत हो चुकी है और 500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं. हालांकि मानवाधिकार संगठनों ने लॉ एंड ऑर्डर की स्थिति के लगातार बिगड़ने की चेतावनी दी है. 21 जनवरी को चुनावी कैंपेन शुरू होने के बाद चार मौतें, 414 घायल और झड़प की 51 घटनाएं दर्ज की गई हैं.
अलग-अलग इलाकों में राजनीतिक हत्याएं
निर्दलीय उम्मीदवार सलमान उमर रुबेल के समर्थक नजरुल इस्लाम की मैमनसिंह के धोबौरा इलाके के इरशाद बाजार में हत्या कर दी गई. वहीं जमात-ए-इस्लामी के सेक्रेटरी रेजाउल करीम की शेरपुर के श्रीबर्दी उपजिला में पीट-पीटकर और ईंटों से कुचलकर मौत हो गई. इसके अलावा अचमिता यूनियन के पूर्व बीएनपी अध्यक्ष और कटियाडी, किशोरगंज-2 से पूर्व यूनियन परिषद सदस्य मोहम्मद कमाल उद्दीन की भी जान चली गई. कंचन, रूपगंज, नारायणगंज में स्वैच्छिक दल के नेता अजहर की मौत भी इसी हिंसा से जुड़ी बताई गई है.
पुलिस आंकड़े क्या कहते हैं
पुलिस हेडक्वार्टर की ओर से जारी साझा आंकड़ों के मुताबिक 12 दिसंबर 2025 से 26 जनवरी 2026 के बीच चुनाव से जुड़ी कुल 144 हिंसक घटनाएं दर्ज की गई हैं. इनमें 55 झड़पें, धमकाने के 11 मामले और उम्मीदवारों पर 6 हमले शामिल हैं. इसके अलावा गैरकानूनी हथियारों से जुड़ी दो घटनाएं, चुनावी कैंपेन में 17 बार बाधा, चुनाव कार्यालयों को निशाना बनाकर आठ हमले और आगजनी, तथा अलग-अलग वजहों से जुड़ी 24 अन्य घटनाएं भी सामने आई हैं.
मानवाधिकार संगठनों की गंभीर चेतावनी
मानवाधिकार सांस्कृतिक फाउंडेशन यानी एमएसएफ ने दिसंबर और जनवरी के तुलनात्मक विश्लेषण में मानवाधिकार स्थिति में तेज गिरावट की रिपोर्ट दी है. एमएसएफ ने हालात को पहले से ज्यादा कठिन, हिंसक और चिंताजनक बताया है. रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव से जुड़ी कुल 64 घटनाओं में से 33 बीएनपी और जमात के बीच झड़पों से संबंधित रहीं. 13 घटनाएं बीएनपी के अंदरूनी विवादों से जुड़ी थीं. नौ मामले बीएनपी समर्थकों और निर्दलीय उम्मीदवारों के बीच टकराव के थे, जबकि एक-एक घटना गोनो ओधिकार परिषद, एक निर्दलीय उम्मीदवार और बीएनपी बनाम एनसीपी से जुड़ी बताई गई है.
पहले के चुनावों से तुलना
ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक ऐन ओ सलीश केंद्र ने बताया है कि केवल जनवरी महीने में कम से कम 75 झड़पें हुईं, जिनमें 11 लोगों की मौत हुई और 616 लोग घायल हुए. 21 जनवरी से 31 जनवरी के बीच कैंपेन शुरू होने के बाद 51 झड़पें दर्ज की गईं, जिनमें कम से कम चार मौतें और 414 घायल सामने आए. मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस के प्रेस विंग के अनुसार 12 दिसंबर से 1 फरवरी तक रात 9.00 बजे तक 53 दिनों में चुनाव से जुड़ी 274 हिंसक घटनाएं हुईं. इसकी तुलना में 10वें नेशनल पार्लियामेंट्री चुनाव के दौरान 22 दिसंबर 2013 से 4 जनवरी 2014 के बीच कुल 530 हिंसक घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिनमें 115 लोगों की मौत हुई थी और 315 लोग घायल हुए थे.