समुद्री कानून की सर्वोच्च अदालत में जज बने बिमल पटेल, भारत के लॉ एक्सपर्ट की बड़ी उपलब्धि

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Bimal Patel: समुद्री कानून और अंतरराष्ट्रीय न्याय व्यवस्था के क्षेत्र में भारत को बड़ी उपलब्धि मिली है. दरअसल, संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय, न्यूयॉर्क में हुए चुनाव में भारतीय विधि विशेषज्ञ डॉ. बिमल पटेल को सदस्य देशों का व्यापक समर्थन मिला, जिसके बाद इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) के न्यायाधीश के रूप में पदभार संभाल लिया है.संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) से जुड़े सदस्य देशों के बीच कराए गए इस चुनाव में 168 वैध मतों में से 115 वोट प्राप्त हुए. जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित इस प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय न्यायाधिकरण में बिमल पटेल का कार्यकाल नौ वर्षों का होगा.

बता दें कि डॉ. पटेल पहले संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल लॉ कमीशन के सदस्य रह चुके हैं और राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय (राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय, गुजरात) के कुलपति की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. उनका चयन भारत की बढ़ती वैश्विक कानूनी उपस्थिति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.

हैम्बर्ग में ली शपथ

डॉ. बिमल पटेल ने गुरुवार को जर्मनी के हैम्बर्ग स्थित इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) मुख्यालय में न्यायाधीश पद की शपथ ली, जिसके बा उनकी नौ वर्षीय कार्यकाल की आधिकारिक शुरुआत हो गई. वहीं, इससे पहले भारतीय न्यायविद् नीरू चड्ढा इस संस्था में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही थीं. उनका कार्यकाल बुधवार को समाप्त हुआ.

कौन हैं बिमल पटेल?

बता दें कि डॉ. बिमल पटेल अंतरराष्ट्रीय कानून के क्षेत्र में भारत के प्रमुख विशेषज्ञों में गिने जाते हैं. उन्होंने नीदरलैंड्स की लीडेन यूनिवर्सिटी और जयपुर नेशनल यूनिवर्सिटी से अंतरराष्ट्रीय कानून में डॉक्टरेट की उपाधि प्राप्त की है. वह संयुक्त राष्ट्र की इंटरनेशनल लॉ कमीशन के सदस्य के रूप में भी काम कर चुके हैं. इसके अलावा, गुजरात स्थित राष्ट्रीय रक्षा विश्वविद्यालय के कुलपति की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. उनका नाम राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अंतर्गत राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के सदस्य के रूप में भी जुड़ा रहा है.

क्या है ITLOS?

दरअसल, इंटरनेशनल ट्रिब्यूनल फॉर द लॉ ऑफ द सी (ITLOS) समुद्री कानून से जुड़े विवादों का समाधान करने वाली दुनिया की प्रमुख न्यायिक संस्था है, जिसकी स्थापना सन् 1982 के संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून सम्मेलन (UNCLOS) के तहत की गई थी. बता दें कि जर्मनी के हैम्बर्ग में स्थित यह न्यायाधिकरण समुद्री सीमाओं, नौवहन अधिकारों, समुद्री संसाधनों और महासागरों से जुड़े अंतरराष्ट्रीय विवादों की सुनवाई करता है.

21 न्यायाधीशों की होती है बेंच

आपकों बता दें कि ITLOS में कुल 21 न्यायाधीश होते हैं, जिनका चयन दुनिया के विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों के संतुलित प्रतिनिधित्व को ध्यान में रखकर किया जाता है. बिमल पटेल के साथ इस बार घाना की सिल्विया अमा अडुसु, ब्राजील के जॉर्ज रोड्रिगो बंदेरा गालिंडो, ट्यूनीशिया के स्लिम लाघमानी और वियतनाम की लैन-अन्ह थी गुयेन ने भी न्यायाधीश के रूप में शपथ ली है.

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