New Delhi: चीन अब ताइवान के साथ कुछ समय से रुके हुए संबंधों को फिर से शुरू करेगा. हालांकि चीन की यह घोषणा रिश्तों में सुधार का संकेत हैं, लेकिन मूल विवाद अब भी बना हुआ है. चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है जबकि ताइवान खुद को स्वतंत्र और अलग शासन वाला क्षेत्र मानता है. इस फैसले में सीधी उड़ानों की बहाली और ताइवान के समुद्री (मत्स्य) उत्पादों का आयात शामिल है. यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था कब और कैसे लागू होगी.
ताइवान के विपक्षी नेताओं ने किया था चीन का दौरा
जानकारी के मुताबिक, ताइवान की विपक्षी पार्टी कुओमिंतांग (KMT) के नेताओं ने हाल ही में चीन का दौरा किया था. इस दौरान उनकी मुलाकात चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने शांति और संवाद बढ़ाने की बात कही. उसके बाद चीन ने यह फैसला लिया है. चीन ने अपने बयान में कहा कि वह ताइवान के साथ एक दीर्घकालिक संवाद तंत्र बनाने की संभावना भी तलाश रहा है, ताकि दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी रह सके.
कब और कैसे लागू होगी यह व्यवस्था
इसके अलावा चीन ने योजना बनाई है कि वह शीआन और उरुमकी जैसे शहरों से ताइवान के लिए सीधी उड़ानें फिर शुरू करेगा. हालांकि, यह अभी स्पष्ट नहीं है कि यह व्यवस्था कब और कैसे लागू होगी. चीन और ताइवान के बीच संबंध 2016 के बाद से लगातार खराब होते गए. जब साई इंग-वेन की पार्टी सत्ता में आई, तो चीन ने ताइवान सरकार के साथ अपने ज्यादातर आधिकारिक संपर्क बंद कर दिए.
व्यापार और यात्रा पर लगा दिए कई प्रतिबंध
चीन ने ताइवान के आस-पास सैन्य गतिविधियां बढ़ा दीं. रोजाना लड़ाकू विमान और जहाज भेजने शुरू किए. व्यापार और यात्रा पर कई प्रतिबंध लगा दिए. इससे व्यापार और यात्रा पर बड़ा असर पड़ा. 2019 में चीन ने अपने नागरिकों के ताइवान जाने पर रोक लगा दी. ताइवान ने भी सख्त वीजा नियम लागू कर दिए. 2021 से चीन ने अनानास, मछली, स्क्विड, टूना जैसी चीजों के आयात पर प्रतिबंध लगा दिया.
प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील दे रहा है चीन
अब चीन इन प्रतिबंधों में धीरे-धीरे ढील दे रहा है, जिससे दोनों के बीच व्यापार बढ़ सकता है. चीन ने यह भी कहा है कि वह मात्सु और किनमेन द्वीपों को जोड़ने के लिए पुल बनाने पर काम करेगा. ये द्वीप ताइवान के हैं, लेकिन भौगोलिक रूप से चीन के काफी करीब हैं. हालांकि ये कदम रिश्तों में सुधार का संकेत हैं, लेकिन मूल विवाद अब भी बना हुआ है.
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