चीन रोकेगा अमेरिका के रेयर मेटल का एक्‍सपोर्ट, ईरान पर हमले की धमकी के बीच बीजिंग की चेतावनी

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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China US Relations: अमेरिका और ईरान के बीच तनाव इस समय चरम पर है, अमेरिकी राष्‍ट्रपति लगातार ईरान पर हमले की धमकी दे रहे है. इसी बीच चीन अब खुलकर ईरान के समर्थन में आ गया है. दरअसल, चीन ने अमेरिका को धमकी दी है कि अगर उसने तेहरान पर हमला किया तो उसका रेयर मेटल का एक्सपोर्ट तुरंत ही रोक दिया जाएगा.

बता दें कि चीन के पास दुनिया में सबसे अधिक रेयर मेटल है, ऐसे में अअमेरिका भी चीन से ही रेयर मेटल खरीदता है. वहीं, चीन ने यह धमकी समय में दी है जब जिनेवा में तेहरान और वाशिंगटन के बीच ओमान की मध्यस्थता में बैठक होनी है. चीन मीडिया के मुताबिक, बीजिंग के इस एक्शन से 48 घंटे के भीतर अमेरिका का सैन्य उद्योग ठप पड़ जाएगा.

रेयर मेटल अमेरिका के लिए क्यों अहम?

यूएस आर्मी की रिपोर्ट के मुताबिक, मिसाइल गाइडेंस सिस्टम और फाइटर जेट्स के इंजन में रेयर मेटल का ही इस्तेमाल किया जाता है. अमेरिका का सबसे खतरनाक एफ-35 में जमकर इसका इस्तेमाल किया गया है. रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका के कुल खर्च का 5 प्रतिशत रेयर मेटल सैन्य उत्पादन में इस्तेमाल किया जाता है. इसके अलावा रेयर मेटल का उपयोग अमेरिका इलेक्ट्रॉनिक चीप बनाने में करता है. बता दें कि अमेरिका के कुल खपत का 90 प्रतिशत तक रेयर मेटल चीन से आता है. ऐसे में अमेरिका के लिए यह धमकी काफी अहम साबित हो सकती है.

ईरान को हथियार बेचने की भी तैयारी

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीन ईरान को हथियार बेचने की तैयारी कर रहा है. दरअसल, ईरान चीन से सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइलें खरीदना चाहता है, जिसको लेकर लगभग सहमति बन चुकी है. डील के तहत ईरान को चीन से सीएम-302 मिसाइलों का जखीरा मिलेगा. ये सुपरसोनिक मिसाइलें लगभग 290 किलोमीटर की मारक क्षमता रखती हैं. इससे मिडिल ईस्ट के अमेरिकी बेस आसानी से तबाह हो सकते हैं.

स्टॉकहोम इंटरनेशनल का मानना है कि चीन जो मिसाइल ईरान को बेच रहा है, वो काफी खतरनाक है. सिपरी के मुताबिक चीन CM-302 को दुनिया की सर्वश्रेष्ठ एंटी-शिप मिसाइल के रूप में पेश करती है, जो विमानवाहक पोत या विध्वंसक पोत को डुबाने में सक्षम है.

चीन के लिए ईरान क्यों है अहम?

ईरान सबसे ज्यादा तेल और ऊर्जा चीन को बेचता है. लॉजिस्टिक मैरीटाइम प्रोफेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक चीन प्रतिदिन कम से कम 1.8 मिलियन बैरल तेल ईरान से खरीदता है. यदि आंकड़ों में देखा जाए तो ईरान का 80 प्रतिशत तेल चीन को जाता है. हाल ही में वेनेजुएला की घटना के बाद चीन की निर्भरता ईरान की तरफ ज्यादा बढ़ गई है.

वहीं अगर ईरान और अमेरिका के बीच जंग छिड़ता है, तो इसका सीधा प्रभाव होर्मुज स्ट्रेट पर पड़ेगा. क्‍योंकि चीन का सारा बिजनेस इसी रास्ते के जरिए होता है. होर्मुज के चॉक होने से चीन को सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान होगा.

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