‘भारत-चीन संबंधों को ‘रणनीतिक ऊंचाई व दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य’ में देखा जाना चाहिए’, एस जयशंकर की टिप्पणी पर चीनी विदेश मंत्रालय ने दी प्रतिक्रिया

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Chinese Foreign Ministry: चीन के विदेश मंत्रालय ने भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर द्वारा हाल ही में की गई टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी है. चीनी विदेश मंत्रालय का कहना है कि भारत और चीन के बीच द्विपक्षीय संबंधों को ‘रणनीतिक ऊंचाई व दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य’ में देखा जाना चाहिए और दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी आम सहमति को लागू करना चाहिए.

दरअसल, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था कि भारत और चीन 2020 के बाद की सीमा स्थिति से उत्पन्न जटिलताओं से खुद को अलग करने की कोशिश कर रहे हैं. ऐसे में दोनों देशों के बीच संबंधों के दीर्घकालिक विकास पर अधिक विचार किये जाने की आवश्यकता है.

विकास के लिए सही रास्‍ता खोजने की आवश्‍यकता

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि हमें द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक ऊंचाई व दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से देखने की जरूरत है, और दोनों देशों के बीच संबंधों को भी मधुर और स्थिर विकास की पटरी पर वापस लाने तथा बड़े पड़ोसी देशों के लिए सद्भाव के साथ रहने तथा साथ-साथ विकास करने के लिए भी सही रास्‍ता खोजने की आवश्‍यकता है.

पिछले दशक में आया बदलाव

भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने 18 जनवरी को मुंबई में नानी पालकीवाला स्मारक व्याख्यान में पिछले दशकों में बीजिंग के साथ नयी दिल्ली के संबंधों के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए कहा था कि पिछले नीति-निर्माताओं की ‘‘गलत व्याख्या’’, चाहे वह ‘‘आदर्शवाद या व्यावहारिक राजनीति की अनुपस्थिति’’ से प्रेरित हो, ने चीन के साथ न तो सहयोग और न ही प्रतिस्पर्धा में मदद की है. पिछले दशक में इस रूख में बदलाव आया है. साथ ही आपसी विश्वास, आपसी सम्मान और आपसी संवेदनशीलता को दोनों पक्षों के बीच संबंधों का आधार बने रहना चाहिए.

दीर्घकालिक विकास पर विचार करने की आवश्‍यकता

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि संबंधों के दीर्घकालिक विकास पर और भी अधिक विचार करने की जरूरत है. जयशंकर के टिप्‍पणियों पर एक प्रश्‍न का जवाब देते हुए गुओ ने कहा कि दो प्रमुख सभ्यताओं, विकासशील देशों और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के रूप में, चीन और भारत को विकास पर ध्यान केंद्रित करने और सहयोग बढ़ाने की जरूरत है. यह दोनों देशों के 2.8 अरब से अधिक लोगों के मौलिक हितों को पूरा करता है. उन्‍होंने कहा कि ये क्षेत्रीय देशों और लोगों की साझा आकांक्षाओं को पूरा करता है, वैश्विक दक्षिण के मजबूत होते ऐतिहासिक रुझान के अनुरूप है तथा इस क्षेत्र और व्यापक विश्व की शांति और समृद्धि के लिए अनुकूल है.

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