Washington: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाटो की आलोचना करते हुए उसे “कागजी शेर” बताया है साथ ही कहा कि अमेरिका सहयोग करता है, लेकिन उसे बदले में पर्याप्त समर्थन नहीं मिलता. ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि अगर जरूरत पड़ी तो क्यूबा के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सकती है, हालांकि इसे उन्होंने हल्के अंदाज़ में कहा. अमेरिकी राष्ट्रपति मियामी में आयोजित सऊदी समर्थित Future Investment Initiative (FII) Priority Summit को संबोधित कर रहे थे.
ईरान के साथ संभावित समझौते पर भी की बात
ट्रंप ने ईरान के साथ संभावित समझौते पर भी बात की और कहा कि किसी भी डील की शर्त होगी कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोला जाए, ताकि वैश्विक तेल आपूर्ति बहाल हो सके. हालांकि, यह बयान ऐसे समय आया है जब मध्य-पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ रहा है और हाल के हमलों में अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं.
एक बार फिर खुद को बताया “महान शांतिदूत”
अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर खुद को “महान शांतिदूत” बताते हुए दावा किया कि उन्होंने पिछले साल दुनिया के कई संघर्षों को रोकने में अहम भूमिका निभाई. ट्रंप ने कहा कि वह चाहते हैं कि उनकी विरासत एक ऐसे नेता के रूप में याद की जाए, जिसने युद्धों को खत्म कराया. ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष को भी रोका. उनके अनुसार दोनों देश एक हफ्ते से लड़ रहे थे और कई सैन्य विमान गिराए जा चुके थे.
दोनों देशों को दी थी चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने दोनों देशों को चेतावनी दी थी कि अगर लड़ाई जारी रही तो वह 250 प्रतिशत टैरिफ लगा देंगे, जिसके बाद संघर्ष रुक गया. इसके अलावा उन्होंने आर्मेनिया-अजरबैजान, कांगो-रवांडा, मिस्र-इथियोपिया, सर्बिया-कोसोवो और इजराइल-हमास जैसे कई संघर्षों को रोकने का भी दावा किया.
“शांतिदूत” वाले दावे पर बहस
ट्रंप के “शांतिदूत” वाले दावे और मौजूदा युद्ध जैसी स्थिति के बीच का अंतर अब वैश्विक स्तर पर बहस का विषय बन गया है. जहां वह खुद को शांति स्थापित करने वाला नेता बता रहे हैं, वहीं जमीन पर बढ़ते संघर्ष उनकी इस छवि पर सवाल खड़े कर रहे हैं.
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