पाकिस्तान में पानी का संकट, बूंद-बूंद के लिए तरस रही कराची की तीन 3 करोड़ की आबादी, अब बना राजनीतिक मुद्दा

Islamabad: भारत से सिंधु जल संधि को स्थगित रखने के फैसले के बाद पाकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची इन दिनों गंभीर जल संकट की चपेट में है. भीषण गर्मी के बीच शहर की लगभग 70 फीसदी आबादी को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है. कई इलाकों में नियमित जलापूर्ति ठप होने से लाखों लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और महंगे निजी टैंकरों पर निर्भर होने को मजबूर हैं.

सिंध सरकार पर तीखा हमला

जल संकट अब राजनीतिक मुद्दा भी बन गया है. जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफिज नईम उर रहमान ने पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) के नेतृत्व वाली सिंध सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि लगभग 18 वर्षों से सत्ता में रहने के बावजूद सरकार कराची को बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने में विफल रही है. उन्होंने आरोप लगाया कि लाखों लोग पानी जैसी आवश्यक जरूरत के लिए संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन सरकार समस्या को स्वीकार करने के बजाय उसे कम करके दिखाने की कोशिश कर रही है.

बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल

उन्होंने सिंध सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट बोर्ड की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और कहा कि भारी बजट खर्च होने के बावजूद नागरिक सुविधाओं में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है. वहीं कराची के मेयर मुर्तजा वहाब द्वारा शहर में जल संकट नहीं होने के दावे को भी विपक्ष ने खारिज कर दिया है. बता दें कि जब जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने सिंधु जल संधि को स्थगित रखने का फैसला किया था.

तेजी से बढ़ती आबादी से अधिक

हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कराची की मौजूदा स्थिति का सीधा संबंध संधि से कम और वर्षों से चली आ रही प्रशासनिक विफलताओं, खराब जल प्रबंधन और तेजी से बढ़ती आबादी से अधिक है. फिर भी जल संकट ने पाकिस्तान में पानी को लेकर चिंताओं को और बढ़ा दिया है. कराची की आबादी करीब तीन करोड़ तक पहुंच चुकी है, जबकि शहर को प्रतिदिन 1,080 मिलियन गैलन से अधिक पानी की आवश्यकता होती है.

दो सप्ताह से जलापूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित

इसके मुकाबले रोजाना 400 मिलियन गैलन से अधिक पानी की कमी बनी हुई है. यही वजह है कि शहर के अनेक इलाकों में पिछले दो सप्ताह से जलापूर्ति गंभीर रूप से प्रभावित है. गुलिस्तान-ए-जौहर, गुलशन-ए-इकबाल, अजीजाबाद, लियाकताबाद, नॉर्थ नाजिमाबाद, नाजिमाबाद और नॉर्थ कराची जैसे इलाकों में रहने वाले लोगों को सबसे अधिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है.

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