New Delhi: पश्चिम एशिया में किसी बड़े सैन्य अभियान के लिए अमेरिका को अब अपने पारंपरिक सहयोगियों का पहले जैसा खुला समर्थन नहीं मिल रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने के लिए शुरू किया गया ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ अचानक रोकना पडा. अब बड़ा खुलासा हुआ है. दरअसल खाड़ी क्षेत्र के सबसे अहम सहयोगी सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने सैन्य अड्डों और हवाई क्षेत्र के इस्तेमाल की अनुमति देने से इनकार कर दिया था.
36 घंटे बाद ही रोकने का ऐलान
यही ट्रंप के पीछे हटने की सबसे बड़ी वजह बनी. ट्रंप ने रविवार को ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ की घोषणा की थी, जिसका मकसद ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर लगाई गई नाकेबंदी को तोड़ना था. लेकिन ऑपरेशन शुरू होने के करीब 36 घंटे बाद ही ट्रंप ने इसे रोकने का ऐलान कर दिया. दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि कि ट्रंप की इस घोषणा से सऊदी अरब नाराज हो गया था.
एयरबेस से विमान उड़ाने की अनुमति नहीं
सऊदी नेतृत्व ने अमेरिका को स्पष्ट संदेश दिया कि वह अमेरिकी सेना को प्रिंस सुल्तान एयरबेस से विमान उड़ाने की अनुमति नहीं देगा. यही वह एयरबेस है जिसे ईरान ने युद्ध के दौरान निशाना बनाया था. इतना ही नहीं सऊदी अरब ने अमेरिका को अपने हवाई क्षेत्र का इस्तेमाल करने से भी रोक दिया. बताया गया कि ट्रंप ने खुद सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से बात कर मामला सुलझाने की कोशिश की, लेकिन कोई समाधान नहीं निकल पाया.
कतर और ओमान जैसे देशों से भी संपर्क
इसके बाद अमेरिका को ऑपरेशन रोकना पड़ा. केवल सऊदी ही नहीं, बल्कि खाड़ी के अन्य अमेरिकी सहयोगी देश भी ट्रंप की अचानक घोषणा से हैरान थे. अमेरिका ने कतर और ओमान जैसे देशों से भी संपर्क किया, लेकिन वहां भी पहले से कोई स्पष्ट तालमेल नहीं था. यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय हुआ जब पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध समाप्त करने को लेकर बातचीत आगे बढ़ रही है. सऊदी अरब इन कूटनीतिक प्रयासों का समर्थन कर रहा है और क्षेत्र में बड़े सैन्य टकराव से बचना चाहता है.
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