Ebola Outbreak: कांगो में इबोला ने मचाया हाहाकार, 600 मौतें, अस्पतालों में बेड पड़ने लगे कम

Shivam
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Ebola Outbreak in Congo: अफ्रीकी देश लोकतांत्रिक गणराज्य कांगो में एक बार फिर जानलेवा इबोला वायरस ने भयावह रूप ले लिया है. संक्रमण का दायरा बढ़ने के साथ मौतों का आंकड़ा भी तेजी से ऊपर गया है. अब तक 600 लोगों की जान जा चुकी है और 1,759 मामलों की पुष्टि की गई है. सबसे चिंताजनक स्थिति अस्पतालों की है, जहां मरीजों की बढ़ती संख्या के बीच 94 प्रतिशत बेड भर चुके हैं.

स्वास्थ्य अधिकारियों की ओर से बुधवार देर रात साझा की गई जानकारी के मुताबिक, इस समय 750 मरीजों को अस्पतालों या आइसोलेशन में रखा गया है. जिस रफ्तार से स्वास्थ्य सेवाओं पर बोझ बढ़ा है, उसने वायरस को नियंत्रित करने की कोशिशों को और मुश्किल बना दिया है.

37 स्वास्थ्य क्षेत्रों तक पहुंचा संक्रमण

मौजूदा प्रकोप बुंडीबुग्यो इबोला वायरस से जुड़ा है. इसकी आधिकारिक घोषणा 15 मई को हुई थी और यह डीआरसी में दर्ज किया गया 17वां इबोला प्रकोप है. वायरस अब किसी एक सीमित इलाके तक नहीं रह गया है, बल्कि इतुरी, नॉर्थ किवु और साउथ किवु प्रांतों के 37 स्वास्थ्य क्षेत्रों को अपनी चपेट में ले चुका है. तीन प्रांतों में संक्रमण फैलने के कारण प्रभावित लोगों तक समय पर पहुंचना और वायरस की कड़ी तोड़ना स्वास्थ्य एजेंसियों के लिए कठिन होता जा रहा है.

हथियारबंद समूहों के कारण कई इलाकों तक पहुंच मुश्किल

शिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट में उन समस्याओं का भी जिक्र किया गया है, जिनकी वजह से प्रकोप के खिलाफ अभियान प्रभावित हो रहा है. कुछ समुदाय पोस्टमार्टम के लिए सैंपल देने का विरोध कर रहे हैं. वहीं, पर्याप्त इलाज क्षमता का अभाव, कमजोर कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और जरूरी सप्लाई की कमी भी बड़ी चुनौती बनी हुई है. स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि कुछ प्रभावित क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था बेहद खराब है. हथियारबंद समूहों की मौजूदगी वाले इलाकों तक स्वास्थ्यकर्मियों की पहुंच सीमित है. लोगों की लगातार आवाजाही और पहले से दबाव झेल रही स्वास्थ्य सुविधाएं संक्रमण नियंत्रण के काम को और जटिल बना रही हैं.

आखिर कैसे फैलता है इबोला वायरस?

इबोला एक दुर्लभ लेकिन बेहद गंभीर बीमारी है, जो कई मामलों में जानलेवा साबित हो सकती है. वायरस जंगली जानवरों, खासकर फ्रूट बैट जैसे जीवों से इंसानों तक पहुंच सकता है. इसके बाद संक्रमित व्यक्ति के बॉडी फ्लूइड्स के सीधे संपर्क में आने पर दूसरे व्यक्ति में संक्रमण फैलने का खतरा रहता है. बीमारी की शुरुआत कई बार अचानक होने वाले बुखार और फ्लू जैसे लक्षणों से होती है. हालत गंभीर होने पर शरीर के महत्वपूर्ण अंगों की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है और वे काम करना बंद कर सकते हैं.

संक्रमण के 21 दिन बाद तक सामने आ सकते हैं लक्षण

इबोला की एक बड़ी चुनौती इसकी लंबी इन्क्यूबेशन अवधि भी है. वायरस के संपर्क में आने के बाद लक्षण 2 से 21 दिनों के बीच कभी भी दिखाई दे सकते हैं. अचानक तेज बुखार, बहुत ज्यादा थकान, मांसपेशियों में दर्द, गंभीर सिरदर्द और गले में खराश इसके प्रमुख संकेतों में शामिल हैं. संक्रमण बढ़ने पर उल्टी, दस्त और पेट दर्द जैसी परेशानियां शुरू हो सकती हैं. गंभीर मरीजों में बिना किसी स्पष्ट वजह के ब्लीडिंग होने या शरीर पर असामान्य निशान दिखाई देने की स्थिति भी बन सकती है.

बुंडीबुग्यो स्ट्रेन ने बढ़ाई मुश्किल

मई 2018 में डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो और युगांडा में भी इबोला प्रकोप की पुष्टि हुई थी. बुंडीबुग्यो प्रजाति को लेकर मुश्किल यह है कि इसके लिए कोई खास इलाज या वैक्सीन उपलब्ध नहीं बताई गई है, हालांकि संभावित वैक्सीन विकसित करने की दिशा में काम जारी है.

मौजूदा संकट ऐसे क्षेत्र में सामने आया है, जहां पहले से मानवीय परिस्थितियां चुनौतीपूर्ण हैं. दूर-दराज के इलाके, घनी आबादी, असुरक्षा और लोगों के साथ व्यापारिक गतिविधियों की भारी आवाजाही वायरस के प्रसार को रोकने की कोशिशों को कमजोर कर रही है. विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इस इबोला प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता का सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया है.

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