Ebola Outbreak: डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला का प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है. संक्रमण के बढ़ते मामलों और मौतों की संख्या ने चिंता बढ़ा दी है. ताजा आंकड़ों के मुताबिक, देश में 1,792 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 625 लोगों की जान जा चुकी है. हालात की गंभीरता को देखते हुए संयुक्त राष्ट्र के मानवीय मामलों के अंडर-सेक्रेटरी-जनरल और इमरजेंसी रिलीफ कोऑर्डिनेटर टॉम फ्लेचर ने वायरस की रोकथाम के लिए तत्काल और तेज कार्रवाई की अपील की है. सबसे बड़ी चिंता यह है कि प्रकोप का केंद्र बना इतुरी प्रांत पहले से संघर्ष और मानवीय संकट की मार झेल रहा है. लोगों की लगातार आवाजाही के बीच वायरस दूसरे इलाकों तक भी पहुंच रहा है, जिससे संक्रमण को नियंत्रित करना और मुश्किल हो सकता है. पड़ोसी युगांडा में भी 20 मामलों की पुष्टि होने की जानकारी सामने आई है.
इबोला की कमर तोड़ने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत
गुरुवार को जारी एक बयान में टॉम फ्लेचर ने स्थिति की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा, “हमें डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला की कमर तोड़ने के लिए तेजी से काम करने की जरूरत है. इतुरी प्रांत इस प्रकोप का केंद्र बना हुआ है, लेकिन वायरस दूसरे प्रांतों में भी फैल रहा है, जहां संघर्ष और लोगों की लगातार आवाजाही से इसके और फैलने का खतरा बढ़ जाता है.” फ्लेचर के मुताबिक, 15 मई को प्रकोप घोषित किए जाने के बाद से डीआरसी में 1,700 से अधिक लोग संक्रमित हुए हैं और 600 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, युगांडा में भी संक्रमण के 20 मामलों की पुष्टि हुई है.
अभी भी बेहद सक्रिय चरण में है प्रकोप
सिन्हुआ समाचार एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, डीआरसी के स्वास्थ्य मंत्री सैमुअल रोजर काम्बा ने गुरुवार को पूर्वी इतुरी प्रांत की राजधानी बूनिया में कहा कि देश में जारी इबोला प्रकोप अभी भी बहुत सक्रिय चरण में है. बूनिया इस प्रकोप का केंद्र बना हुआ है. काम्बा ने ज्यादा जनसंख्या घनत्व, लोगों की लगातार आवाजाही और समुदायों को साथ जोड़ने में आ रही स्थानीय चुनौतियों का जिक्र किया. उनके मुताबिक, अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि प्रकोप कब अपने चरम पर पहुंचेगा.
‘यह सिर्फ पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी से कहीं ज्यादा’
इबोला संकट को व्यापक मानवीय हालात से जोड़ते हुए टॉम फ्लेचर ने कहा, “यह सिर्फ एक पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी से कहीं ज्यादा है.” उन्होंने बताया कि वायरस फैलने से पहले ही लाखों लोग संघर्ष, भुखमरी, विस्थापन, कमजोर बुनियादी सेवाओं और सीमित स्वास्थ्य सुविधाओं जैसी गंभीर समस्याओं का सामना कर रहे थे. ऐसे में इबोला का बढ़ता प्रकोप पहले से कमजोर समुदायों पर अतिरिक्त दबाव डाल रहा है.
संयुक्त राष्ट्र बढ़ा रहा अपने प्रयास
फ्लेचर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र इबोला से निपटने के लिए अपने प्रयास तेज कर रहा है. उन्होंने दूसरे देशों, संस्थाओं और संबंधित पक्षों से भी उसी तेजी के साथ आगे आने की अपील की. उनका कहना है कि संक्रमण पर नियंत्रण के लिए केवल चिकित्सा व्यवस्था पर्याप्त नहीं होगी. प्रभावित इलाकों तक स्वास्थ्य और मानवीय सहायता पहुंचाने के लिए सुरक्षित रास्ते, जरूरी सामान की निर्बाध आपूर्ति और राहत कार्यों के लिए समय पर फंड उपलब्ध होना भी बेहद जरूरी है.
राहत और स्वास्थ्य कर्मियों की सुरक्षित पहुंच की मांग
टॉम फ्लेचर ने कहा, “सभी पक्षों को मानवीय और स्वास्थ्य कर्मियों, जरूरी सामान और राहत उपकरणों की सुरक्षित और लगातार पहुंच सुनिश्चित करनी चाहिए. सीमाएं और सप्लाई रूट खुले रहने चाहिए. दान देने वालों को यह पक्का करना चाहिए कि वादा किया गया फंड तेजी से और आसानी से राहत कार्य करने वालों तक पहुंचे. हमें इबोला से निपटने के प्रयासों और उस बड़े मानवीय अभियान, जिस पर कमजोर समुदाय निर्भर हैं, दोनों का समर्थन करना चाहिए.” उनके इस बयान में प्रभावित क्षेत्रों तक निर्बाध मानवीय पहुंच पर विशेष जोर दिया गया है. संघर्ष से प्रभावित इलाकों में राहत और स्वास्थ्य सेवाओं का पहुंचना पहले से चुनौतीपूर्ण है, जिससे संक्रमण रोकने के प्रयास और कठिन हो सकते हैं.
1,792 कन्फर्म केस, 625 लोगों की मौत
डीआरसी के संचार और मीडिया मंत्रालय ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर ताजा आंकड़े साझा किए. इनके मुताबिक, देश में अब तक इबोला के 1,792 मामलों की पुष्टि हुई है और 625 लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं, 764 मरीज आइसोलेशन या अस्पताल में भर्ती हैं, जबकि 295 मरीज ठीक हो चुके हैं. सामने आए आंकड़ों के अनुसार, इस प्रकोप में कुल मृत्यु दर 34.1 प्रतिशत दर्ज की गई है.
यह भी पढ़े: India-New Zealand Relations: पीएम मोदी की यात्रा से रिश्तों को नई रफ्तार, FTA पर साइमन वॉट्स का बड़ा बयान