टेक्नोलॉजी की दुनिया में फ्रांस ने किया बदलाव, कंप्यूटरों पर Microsoft नहीं Linux होगा यूज

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France Microsoft Windows Switch Linux : हाल ही में दुनिया की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है. इस बदलाव को लेकर कहा जा रहा है कि यह कदम आने वाले समय में पूरी दुनिया के डिजिटल सिस्टम पर असर डाल सकता है. ऐसे में फ्रांस सरकार का कहना है कि अब उसके सरकारी कंप्यूटरों में Microsoft Windows की जगह Linux ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल किया जाएगा. बता दें कि यह सिर्फ एक सॉफ्टवेयर बदलने का फैसला नहीं है, बल्कि इसके पीछे एक बड़ी सोच है.

इसका उद्देश्‍य देश को डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बनाना और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम करना है. बता दें कि फ्रांस का यह कदम डिजिटल सोवर्जिनिटी की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है, जिसका मतलब है कि देश अपने डेटा, सिस्टम और टेक्नोलॉजी पर खुद का पूरा कंट्रोल चाहता है. चलिए जानते हैं कि Linux, Microsoft से कितना एडवांस है.

Linux कितना एडवांस है?

प्राप्‍त जानकारी के अनुसार Linux एक ओपन-सोर्स ऑपरेटिंग सिस्टम है. इसका मतलब है कि इसे कोई भी इस्तेमाल कर सकता है. इसके साथ ही इसमें बदलाव भी किए जा सकते हैं. क्‍योंकि यह किसी एक कंपनी के कंट्रोल में नहीं होता है. इसके मुकाबले Windows एक प्राइवेट सिस्टम है, जिसे Microsoft कंपनी कंट्रोल करती है. ऐसे में फ्रांस सरकार का कहना है कि Linux इस्तेमाल करने से डेटा पर बेहतर कंट्रोल मिलेगा, सुरक्षा बढ़ेगी और विदेशी कंपनियों पर निर्भरता कम होगी.

फ्रांस सरकार का बड़ा डिजिटल प्लान

इसके साथ ही फ्रांस की डिजिटल एजेंसी DINUM इस पूरे बदलाव को लागू कर रही है. योजना के अनुसार, धीरे-धीरे सभी सरकारी कंप्यूटर Windows से Linux पर शिफ्ट होंगे. बताया जा रहा है कि हर मंत्रालय को 2026 तक अपनी माइग्रेशन योजना तैयार करनी होगी. सिर्फ कंप्यूटर ही नहीं, पूरा डिजिटल सिस्टम बदला जाएगा. यह बदलाव सिर्फ Windows हटाकर Linux लगाने तक सीमित नहीं है.

डिजिटल सोवर्जिनिटी का मतलब

ऐसे में डिजिटल सोवर्जिनिटी का मतलब है कि कोई देश अपने डिजिटल सिस्टम और डेटा पर पूरी तरह कंट्रोल रखे. ऐसे में फ्रांस सरकार का कहना है कि अब समय आ गया है जब डेटा दूसरे देशों की कंपनियों के पास न रहे, कीमतों और नियमों पर बाहरी कंट्रोल न हो, देश की सुरक्षा किसी बाहरी सिस्टम पर निर्भर न हो. इसी वजह से यह फैसला बहुत जरूरी माना जा रहा है.

अमेरिकी कंपनियों पर बढ़ सकता है दबाव

फ्रांस पहले से ही कुछ अपने डिजिटल टूल्स को बढ़ावा दे रहा है, जैसे Tchap  सरकारी मैसेजिंग ऐप, Visio वीडियो कॉलिंग के लिए, FranceTransfert  फाइल शेयरिंग के लिए, इन टूल्स का इस्तेमाल बढ़ाकर विदेशी ऐप्स पर निर्भरता कम की जा रही है. इतना ही नही बल्कि सरकार ने यह भी तय किया है कि देश का स्वास्थ्य डेटा सिस्टम भी 2026 तक नए विश्वसनीय प्लेटफॉर्म पर शिफ्ट होगा. इसके प्रभाव में दूसरे यूरोपीय देश भी ऐसा कर सकते हैं, Microsoft और अन्य अमेरिकी कंपनियों पर दबाव बढ़ सकता है और ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर को बढ़ावा मिलेगा.

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