New Delhi: ईरान से चल रही डील के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप किसी भी तरह का विवाद नहीं चाहते हैं. इसी बीच फ्रांस में चल रहे G7 शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप ने अपने सबसे करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले इजराइल की जमकर धज्जियां उड़ाईं और नेतन्याहू को सार्वजनिक मंच पर खरी-खोटी सुना डाली. बयान ने अंतरराष्ट्रीय राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है.
लेबनान में सैन्य कार्रवाइयों से खुश नहीं
कतर के अमीर तमीम बिन हमद अल थानी के साथ बैठक के बाद ट्रंप ने कहा कि नेतन्याहू को लेबनान के मुद्दे पर अधिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि वह लेबनान में इजरायल की कुछ सैन्य कार्रवाइयों से खुश नहीं हैं. ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ समझौते की घोषणा से कुछ घंटे पहले बेरूत पर इजरायली हमले उन्हें बिल्कुल पसंद नहीं आए. हालांकि ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अब भी इजरायल की सुरक्षा का समर्थन करते हैं और ईरान को परमाणु हथियार हासिल नहीं करने देंगे.
हमला बिल्कुल अच्छा नहीं लगा
अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि मैंने इजरायल को यह बात बता भी दी थी. मुझे वह हमला बिल्कुल अच्छा नहीं लगा. यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि ट्रंप प्रशासन को अब तक नेतन्याहू सरकार का सबसे मजबूत समर्थक माना जाता रहा है. लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ जारी सैन्य अभियान पर ट्रंप ने कहा कि बहुत ज्यादा लोग मारे जा रहे हैं. किसी एक व्यक्ति की तलाश में हर बार पूरी अपार्टमेंट बिल्डिंग गिराने की जरूरत नहीं होती, क्योंकि उन इमारतों में रहने वाले सभी लोग हिजबुल्लाह के सदस्य नहीं होते.
लेबनान में हिजबुल्लाह से निपटने की जिम्मेदारी
ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने इजरायल को सुझाव दिया था कि लेबनान में हिजबुल्लाह से निपटने की जिम्मेदारी Syria को देनी चाहिए. उनके अनुसार, मुझे लगता है कि सीरिया यह काम बेहतर तरीके से कर सकता है. ट्रंप ने इस मौके पर कतर की भी जमकर प्रशंसा की और कहा कि अमेरिका-ईरान समझौते को अंतिम रूप देने में कतर ने साहसिक और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. उन्होंने कतर के अमीर को अपना स्थायी मित्र बताया.
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