क्या है हैम्बर्ग प्राइड परेड डे? भारी सुरक्षा के बीच 3 लाख से अधिक लोगों ने निकाला मार्च, जानिए इसका उद्देश्य

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Hamburg Pride Parade: जर्मनी के हैम्बर्ग में 1 अगस्त को हैम्बर्ग प्राइड परेड डे का आयोजन किया गया था, जिसका उद्देश्य- क्वीयर कम्युनिटी के साथ एकजुटता रहा. इस दौरान भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई, क्योकि आयोजकों के मुताबिक, इस मार्च में करीब 3 लाख लोगों ने हिस्सा लिया. दरअसल, हाल ही में यूरोप में प्राइड आयोजनों के दौरान सुरक्षा संबंधी चिंताओं और कुछ घटनाओं को देखते हुए प्रशासन ने पुलिस बल की अतिरिक्त तैनाती की थी. इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोगों ने LGBTQIA+ समुदाय के अधिकारों, समानता और सामाजिक स्वीकार्यता के समर्थन में सड़कों पर मार्च निकाला.

क्या है हैम्बर्ग प्राइड परेड

बता दें कि हैम्बर्ग प्राइड परेड जर्मनी के सबसे बड़े LGBTQIA+ आयोजनों में से एक है. इसे जर्मनी में आमतौर पर क्रिस्टोफर स्ट्रीट डे (Christopher Street Day-CSD) के नाम से भी जाना जाता है. यह सिर्फ इवेंट नहीं, बल्कि समान अधिकार, भेदभाव के खिलाफ आवाज और सामाजिक एकता का एक बड़ा कैंपेन माना जाता है. इस दौरान लोग इंद्रधनुषी झंडे, रंग-बिरंगे कपड़े और सोशल मैसेज वाले बैनर लेकर हैम्बर्गी की सड़कों पर मार्च करते हैं. इसमें कल्चरल प्रोग्राम, म्युजिक, स्पीच और अवेयरनेस को लेकर बाते होती हैं.

क्या है इसका इतिहास

हैम्बर्ग प्राइड परेड का इतिहास 28 जून 1969 को अमेरिका के न्यूयॉर्क स्थित स्टोनवॉल इन में हुई घटना से जुड़ा है. उस वक्त पुलिस कार्रवाई के खिलाफ LGBTQ समुदाय ने विरोध प्रदर्शन किया था, जिसे मॉडर्न LGBTQ अधिकार आंदोलन की शुरुआत माना जाता है. इसी ऐतिहासिक घटना की याद में दुनिया के कई देशों में हर साल प्राइड मार्च आयोजित किए जाते हैं, और जर्मनी में क्रिस्टोफर स्ट्रीट डे (CSD) के रूप में इस आंदोलन को मनाया जाता है, जिसका नाम न्यूयॉर्क की उसी सड़क के नाम पर रखा गया है जहां स्टोनवॉल इन स्थित है.
हाल के महीनों में कुछ देशों में सार्वजनिक कार्यक्रमों के दौरान सुरक्षा संबंधी घटनाओं और संभावित खतरों की चेतावनी को देखते हुए इस बार यूरोप में सार्वजनिक आयोजनों को लेकर सुरक्षा एजेंसियां पहले से अधिक सतर्क थीं. हैम्बर्ग पुलिस ने पूरे मार्ग पर अतिरिक्त सुरक्षा बल तैनात किए. ड्रोन निगरानी, बैरिकेडिंग और आपातकालीन चिकित्सा टीमों की भी व्यवस्था की गई, जिससे प्राइड डे शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके.

LGBTQ समुदाय को पहले की तुलना में मिले और कानूनी अधिकार

दरअसल, हैम्बर्ग प्राइड परेड सिर्फ एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं है, बल्कि समानता, मानवाधिकार और सामाजिक न्याय का प्रतीक भी है, जिसका उद्देश्य LGBTQIA+ समुदाय के लोगों के खिलाफ होने वाले भेदभाव, हिंसा और असमानता के मुद्दों को सामने लाना है. हालांकि जर्मनी समेत कई देशों में LGBTQ समुदाय को पहले की तुलना में अधिक कानूनी अधिकार मिले हैं, लेकिन सामाजिक स्वीकार्यता और समान अवसरों को लेकर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं. ऐसे में प्राइड परेड समाज को समावेश, विविधता और समान अधिकारों का संदेश देने का महत्वपूर्ण मंच बन गई है.

 

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