होर्मुज स्ट्रेट के जरिए तेल बहाल करने का काेशिश, साउथ कोरिया ने शुरू की ईरान के साथ बातचीत

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Hormuz Strait: दक्षिण कोरिया, ईरान समेत कई देशों के साथ करीबी बातचीत कर रहा है ताकि होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्दी से सामान्य किया. इसकी जानकारी विदेश मंत्रालय के एक अधिकारी की ओर से दी गई है. ऐसा तब हुआ जब तेहरान ने कहा कि वह जापान जाने वाले जहाजों को उस समुद्री रास्ते से गुजरने देने के लिए तैयार है जो मिडिल ईस्ट संकट के चलते लगभग बंद हो गया था.

अधिकारी ने कहा कि “सरकार मिडिल ईस्ट में हो रहे डेवलपमेंट पर करीब से नजर रख रही है, साथ ही अपने नागरिकों की सुरक्षा और एनर्जी ट्रांसपोर्ट रूट को सुरक्षित करने के तरीके भी ढूंढ रही है. हम ईरान समेत संबंधित देशों के साथ एक्टिव रूप से बातचीत कर रहे हैं.”

होर्मुज स्ट्रेट से हाेता है दुनिया के 20 प्रतिशत से ज्यादा तेल ट्रेड

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पहले बताया था कि तेहरान, टोक्यो के साथ सही सलाह-मशविरा के बाद जापान जाने वाले जहाजों को मुख्य तेल शिपिंग रूट से गुजरने की इजाजत देने के लिए तैयार है. रिपोर्ट के मुताबिक, होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के 20 प्रतिशत से ज्यादा तेल ट्रेड होता है. तेल टैंकरों के सभी लेन ईरानी जलक्षेत्र में आते हैं, जिससे यह स्ट्रेट दक्षिण कोरिया और जापान समेत पूर्वी एशिया के देशों के लिए एक जरूरी लाइफलाइन बन गया है.

वहीं, शुक्रवार को सोल ने कहा कि वह खाड़ी में ईरान के हमलों और होर्मुज स्ट्रेट को असल में बंद करने की निंदा करने वाले अपने जॉइंट स्टेटमेंट में यूरोपीय देशों और जापान समेत सात देशों के साथ शामिल होगा.

ईरान के खिलाफ कम हाेगी अमेरिकी कार्रवाई

इसके अलावा, यूएस राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को कहा कि उनका प्रशासन ईरान के खिलाफ अपने मिलिट्री ऑपरेशन को “कम करने” पर विचार कर रहा है, साथ ही उन्होंने साउथ कोरिया, चीन, जापान और दूसरे देशों से होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करने की जरूरी कोशिशों में शामिल होने को कहा. ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान में अमेरिका अपने लक्ष्यों के ‘काफी करीब’ पहुंच चुका है.

उन्होंने बताया कि अब मिडिल ईस्ट में सैन्य कार्रवाई को धीरे-धीरे कम करने पर विचार किया जा रहा है. ट्रंप ने कहा कि अमेरिका का लक्ष्य ईरान की मिसाइल क्षमता और उससे जुड़े सभी सिस्टम को पूरी तरह कमजोर करना है, ईरान के रक्षा उत्पादन ढांचे को नष्ट करना है, उसकी नौसेना और वायुसेना के साथ ही उसके एंटी-एयरक्राफ्ट सिस्टम को खत्म करना और यह सुनिश्चित करना है कि ईरान कभी भी परमाणु क्षमता के करीब न पहुंच सके और अगर ऐसा होता है तो अमेरिका तुरंत और मजबूत प्रतिक्रिया देने की स्थिति में रहे. यूएस-इजरायली एयरस्ट्राइक के बाद से मिडिल ईस्ट में संघर्ष बढ़ गया, जिससे ईरान ने स्ट्रेट को ब्लॉक कर दिया और वैश्विक ऊर्जा संकट को लेकर चिंता बढ़ गई.

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