हंगरी में प्रो-रूसी प्रधानमंत्री ने यूक्रेन के खिलाफ चलाया बड़ा अभियान, जानिए क्या है इसकी वजह

Hungary : हंगरी के प्रो-रूसी प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने यूक्रेन के खिलाफ ऐसा अभियान चला दिया है, जिसे जानकर दुनिया में सभी का होश उड़ जाएगा. ओरबान देश में होने वाले आगामी चुनावों में कड़ी चुनौती का सामना कर रहे हैं. यही वजह है कि वह मतदाताओं को यह समझाने की कोशिश कर रहे हैं कि देश के लिए सबसे बड़ा खतरा आर्थिक ठहराव नहीं, जिस पर उनकी मुख्य विपक्षी का फोकस है…बल्कि पड़ोसी यूक्रेन है. बता दें कि ओरबान ने यूक्रेन के खिलाफ एक आक्रामक मीडिया अभियान शुरू कर दिया है. सबसे महत्‍वपूर्ण बात इसमें काफी गलत सूचना दी गई है.

ओरबान के अभियान का मुख्य संदेश

प्राप्‍त जानकारी के मुताबिक, ओरबान के अभियान का मुख्य संदेश यह है कि हंगेरियंस को यूरोप के बाकी हिस्सों के साथ मिलकर यूक्रेन का समर्थन करने से इनकार कर देना चाहिए, माना जा रहा है कि रूस के आक्रमण के खिलाफ यूक्रेन की लड़ाई देश को दिवालिया कर सकती है और युवाओं को फ्रंटलाइन पर मौत के मुंह में धकेल सकती है. इसके साथ ही देश भर में लगाए गए बिलबोर्ड्स पर AI-जनरेटेड इमेजेस दिखाई जा रही हैं, जिनमें यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लादिमिर ज़ेलेंस्की यूरोपीय अधिकारियों के साथ खड़े हैं और हाथ फैलाकर पैसे मांगते दिख रहे हैं. यह रक्षा मजबूत करने के प्रयासों का अप्रत्यक्ष संदर्भ है, क्योंकि युद्ध अब पांचवें साल में प्रवेश कर रहा है.

हंगरी के आगामी चुनाव का परिणाम

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, ये सार्वजनिक रूप से फंडेड बिलबोर्ड्स पर लिखा है कि “ब्रसेल्स को हमारा संदेश: हम भुगतान नहीं करेंगे! इससे यह स्‍पष्‍ट हो गया कि हंगरी के आगामी चुनाव का परिणाम उसकी सीमाओं से बाहर भी गूंजेगा. इसी वजह से हंगरी ने रूस पर नए EU प्रतिबंधों के पैकेज को ब्लॉक कर दिया, इसके साथ ही यूक्रेन से गुजरने वाली रूसी तेल आपूर्ति में रुकावट आई थी. बताया जा रहा है कि ओरबान ने वादा किया कि तेल प्रवाह बहाल होने तक वे किसी भी प्रो-यूक्रेन नीति को वीटो करेंगे.

हंगरी ने रूस के साथ बढ़ाया सहयोग

इसके साथ ही ओरबान को EU में क्रेमलिन का सबसे मजबूत सहयोगी माना जाता है. जानकारी कके मुताबिक, 24 फरवरी 2022 को रूस के युद्ध शुरू होने के बाद ब्लॉक के बाकी 26 देशों ने रूस से दूरी बनाई है, वहीं सभी के दूरी बनाने के बाद हंगरी ने सहयोग बढ़ाया है. साथ ही ओरबान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ अपने रिश्ते को व्यावहारिक बताते हैं, इसका मुख्‍य कारण है कि हंगरी को रूसी तेल और गैस की विश्वसनीय आपूर्ति मिलती है.

ओरबान को मिली सबसे बड़ी चुनौती

बता दें कि 2010 से सत्ता में रहे ओरबान को 12 अप्रैल 2026 को होने वाले चुनाव में अब तक की सबसे बड़ी चुनौती मिल रही है. इसके साथ ही EU के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले नेता और उनकी दक्षिणपंथी Fidesz पार्टी अधिकांश स्वतंत्र पोल्स में उभरते सेंटर-राइट चुनौतीकर्ता पीटर माग्यार से पीछे हैं. इतना ही नही बल्कि माग्यार की उन्नति Fidesz के राजनीतिक घोटालों से हुई, जैसे बच्चे यौन शोषण मामले में सहयोगी को राष्ट्रपति क्षमा, जिससे राष्ट्रपति और न्याय मंत्री को इस्तीफा देना पड़ा.

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