एक ओर पीएम मोदी से बात दूसरी ओर चीन-पाक सीमा आयोग की बैठक…आखिर क्या है ड्रैगन के मंसूबे

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

India China Relations: भारत और चीन के रिश्ते पिछले कुछ समय से ऐसे मोड़ पर हैं, जिन्हे समझना काफी मुश्किल है. दरअसल एक ओर दोनों देश तनाव कम करने और बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं. दूसरी तरफ सीमा से जुड़े ऐसे कदम सामने आ रहे हैं, जो नई दिल्ली की चिंता बढ़ा सकते हैं. बता दें कि हाल ही में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग के बीच आपसी सम्मान, आपसी हित और एक-दूसरे की संवेदनशील चिंताओं का ध्यान रखने की बात हुई. लेकिन इसके महज तीन दिन बाद ही चीन ने पाकिस्तान के साथ सीमा प्रबंधन से जुड़े संयुक्त आयोग को सक्रिय कर दिया.

दरअसल, भारत 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को शुरू से ही अवैध और अमान्य मानता रहा है. उसका कहना है कि पाकिस्तान ने जिस क्षेत्र को चीन को सौंपा था, वह भारतीय क्षेत्र है और पाकिस्तान उस पर अवैध कब्जे में है. ऐसे में चीन और पाकिस्तान का सीमा आयोग सक्रिय होना नई दिल्ली के लिए सिर्फ प्रशासनिक या तकनीकी सहयोग का मामला नहीं है. इसमें क्षेत्रीय दावे और संप्रभुता का सवाल भी जुड़ जाता है.

चीन-पाकिस्तान का सीमा आयोग सक्रिय

मोदी-शी जिनपिंग के मुलाकात के तीन दिन बाद ही पाकिस्तान और चीन ने पाकिस्तान-चीन सीमा संयुक्त आयोग की पहली बैठक की, जिसे पाकिस्तान की ओर से सीमा प्रबंधन, संयुक्त सीमा सर्वेक्षण, व्यापारिक आवाजाही और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया गया. वहीं, सतह पर देखें तो यह चीन और पाकिस्तान के बीच सीमा प्रबंधन का मामला है. लेकिन भारत के लिए इसकी संवेदनशीलता इसलिए बढ़ जाती है क्योंकि चीन-पाकिस्तान सीमा का एक हिस्सा उस क्षेत्र से जुड़ा है, जिसे भारत अपना अभिन्न हिस्सा मानता है.

शक्सगाम घाटी का है असली विवाद

बता दें कि भारत का आधिकारिक रुख है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं. नई दिल्ली के अनुसार, पाकिस्तान ने भारतीय क्षेत्र पर जबरन अवैध कब्जा कर रखा है. इसलिए पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्र से जुड़े किसी समझौते में शामिल होने का अधिकार नहीं है. यही वजह है कि चीन-पाकिस्तान सीमा आयोग का सक्रिय होना भारत के लिए सामान्य द्विपक्षीय गतिविधि नहीं माना जा सकता.

भारत ने आयोग को कानूनी आधारहीन बताया

भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने चीन-पाकिस्तान सीमा आयोग की पहली बैठक पर आपत्ति जताई. भारत का कहना है कि चीन और पाकिस्तान के बीच ऐसी कोई सीमा नहीं है जिसे भारत कानूनी रूप से स्वीकार करता हो. नई दिल्ली ने 1963 के चीन-पाकिस्तान सीमा समझौते को फिर से ‘अवैध और अमान्य’ बताया. भारत ने यह भी कहा कि पाकिस्तान को भारतीय क्षेत्र से जुड़े किसी भी मामले में समझौता करने का अधिकार नहीं है.

क्यों इसे माना जा रहा है चीन की चाल?

जानकारों का कहना है कि भारत के नजरिए से इसे देखें तो इस घटनाक्रम का सबसे महत्वपूर्ण पहलू इसका समय है. पीएम मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात में दोनों देशों के बीच संवेदनशील मुद्दों का सम्मान करने की बात होती है. इसके कुछ ही दिन बाद चीन उसी पाकिस्तान के साथ सीमा व्यवस्था को आगे बढ़ाता है, जिसके कब्जे वाले क्षेत्र को भारत अपना हिस्सा मानता है.
इसका मतलब यह जरूरी नहीं कि चीन भारत के साथ संवाद को पूरी तरह छोड़ रहा है. बल्कि एक दूसरा अर्थ यह हो सकता है कि बीजिंग भारत के साथ संबंध सुधारने की कोशिश के समानांतर पाकिस्तान के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी को भी जारी रखना चाहता है. यानी चीन की नीति में दोनों चीजें एक साथ चल सकती हैं, भारत के साथ तनाव कम करने की बातचीत और पाकिस्तान के साथ रणनीतिक सहयोग.
Latest News

Pitru Paksha 2026: कब से शुरू हो रहा पितृ पक्ष, नोट कर लें श्राद्ध की महत्वपूर्ण तिथियां

Pitru Paksha 2026: सनातन धर्म में पितृ पक्ष को बेहद ही महत्वपूर्ण अवधि माना जाता है. क्योंकि इस दौरान हमारे...

More Articles Like This

Exit mobile version