भारत ने अमेरिका समेत इन 4 सुपरपावर्स को साधा, मुट्ठी में आई दुनिया

India Defence Deals : भारत के रक्षा मंत्रालय ने करीब 3.60 लाख करोड़ रुपये के रक्षा प्रस्तावों को मंजूरी दी. बता दें कि इससे पहले बीते कुछ महीनों में कई अन्य प्रोजेक्ट्स को मंजूरी दी गई है. क्‍योंकि भारत अपनी रक्षा प्रणालियों को पहले से और भी ज्‍यादा मजबूत करना चाहता है. लेकिन, भारत ने अपनी इन रक्षा तैयारियों में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव किया है. बता दें कि अब वह किसी एक देश पर पूरी तरह निर्भर नहीं है. क्‍योंकि आज के समय में भारत ने अपनी विदेश नीति की तरह ही रक्षा खरीद नीति में मल्टीपोलर बना दिया है. भारत ने इस नीति में रूस के साथ-साथ अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी जैसे सुपरपावर्स को साधने का काम किया है.

बता दें कि भारत की इस रणनीति का उद्देश्य किसी एक वैश्विक पावर पर अत्यधिक निर्भरता से बचते हुए पूर्व और पश्चिम दोनों से सर्वश्रेष्ठ तकनीक हासिल करने की है. कुछ ही समय पहले रूस, अमेरिका, फ्रांस और जर्मनी के साथ बड़े सौदों ने इन देशों को साधने के साथ भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा, आत्मनिर्भरता और रणनीतिक स्वायत्तता को भी मजबूत किया है.

एस-400 सिस्टम की मिसाइलें खरीद फैसला

ऐसे में वैश्विक भू-राजनीतिक बदलावों के बावजूद रूस मौजूदा वक्त में सैन्य हार्डवेयर का सबसे बड़ा आपूर्तिकर्ता है. इतना ही नहीं बल्कि रक्षा मंत्रालय ने रूस से 10 हजार करोड़ में एस-400 सिस्टम की मिसाइलें खरीद फैसला किया. इसी तरह रूस के साथ मिलकर ही यूपी के अमेठी में 6 लाख से अधिक AK-203 असॉल्ट राइफलों का स्वदेशी उत्पादन चल रहा है. इसके साथ ही सरकारी कंपनी एचएएल में Su-30MKI इंजनों का निर्माण भी रूस के सहयोग से चल रहा है.

व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी

जानकारी के मुताबिक, अमेरिका के साथ संबंध खरीदार-विक्रेता से व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी तक पहुंच चुके हैं. बताया जा रहा है कि यह सौदा मार्च 2026 तक फाइनल होने की उम्मीद है, जो तेजस MkII और AMCA जैसे स्वदेशी फाइटर को पावर देगा. इसके साथ ही 31 MQ-9B सी गार्जियन ड्रोन और 6 अतिरिक्त P-8I पोसीडॉन विमानों की खरीद हिंद महासागर में अभूतपूर्व निगरानी प्रदान करेगी. जबकि भारत को ‘सबमरीन हंटर’ जैसी उन्नत क्षमता मिलती है.

फ्रांस भारत का भरोसेमंद साझेदार

भारत का सबसे भरोसेमंद पश्चिमी साथी फ्रांस है और यहां कोई भी सौदा करने में कोई शर्त नही लगाई जाती. ऐसे में 36 राफेल फाइटर की सफल खरीद के बाद रक्षा मंत्रालय की रक्षा खरीद परिषद ने 114 राफेल जेट्स की मंजूरी दी है. यह दोनों देशों के बीच अभी तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा है. इनमें से ज्यादातर भारत में निर्मित होंगे, जिसमें 50 फीसदी स्वदेशी सामग्री होगी.

अंडरवाटर डोमिनेंस में जर्मनी की प्रमुख भूमिका

बता दें कि जर्मनी भारत की अंडरवाटर डोमिनेंस में प्रमुख भूमिका निभा रहा है. प्रोजेक्ट-75(I) के तहत थिसेनक्रुप मरीन सिस्टम्स (TKMS) के साथ 6 एडवांस्ड कन्वेंशनल सबमरीन का सौदा करीब $8-10 बिलियन (70,000-90,000 करोड़) का है. इसके साथ ही जनवरी 2026 में जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की यात्रा के दौरान सहमति पत्र पर हस्ताक्षर हुए और मार्च तक यह सौदा फाइनल होने की उम्मीद है. जिसमें फुल टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा. ये सबमरीन लंबे समय तक पानी के नीचे रह सकेंगी.

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