New Delhi: भारत ने नेपाल के लिए अपना पांचवां राहत विमान रवाना किया है. इस विमान में 11 सदस्यों की विशेष बचाव टीम, जरूरी बचाव उपकरण और करीब 5.5 टन दवाइयां भेजी गई हैं. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर इसकी जानकारी दी. उन्होंने बताया कि भारत नेपाल की जरूरतों को देखते हुए लगातार राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीमें भेज रहा है. भारत की ओर से अब तक 68 टन से ज्यादा राहत सामग्री नेपाल पहुंचाई जा चुकी है. नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत लगातार राहत और बचाव कार्यों में लगातार अपनी मदद दे रहा है.
राहत सामग्री में कई जरूरी सामान शामिल
भारत ने राहत सामग्री में कई जरूरी सामान शामिल किए हैं. इनमें कंबल, स्लीपिंग बैग, तिरपाल, प्लास्टिक शीट और हाइजीन किट शामिल हैं. इसके अलावा दवाइयां, खाने के पैकेट, सोलर लैंप, पानी साफ करने वाली गोलियां और पोर्टेबल जनरेटर भी नेपाल भेजे गए हैं. इन सामानों का इस्तेमाल बाढ़ प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने के लिए किया जा रहा है. इससे पहले भी भारत की ओर से जो 4 विमान भेजे गए, उसमें राहत सामग्री के साथ-साथ स्पेशल रेस्क्यू टीमें और उपकरण भेजे गए थे.
स्थिति काबू में नहीं आई
फिलहाल नेपाल में स्थिति काबू में नहीं आई है और हजारों लोगों को कोई पता नहीं चल रहा है. नेपाल में पिछले सप्ताह आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है. कई इलाकों में नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण बड़ी संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं. अब तक बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में मरने वालों की संख्या 1120 के पार पहुंच चुकी है. अलग-अलग जिलों में नदी किनारे शव मिलने का सिलसिला जारी है. नेपाल की नेशनल डिजास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी के अनुसार अब तक 1100 से ज्यादा शव बरामद किए जा चुके हैं.
अभी भी 4606 लोग लापता
इनमें सबसे अधिक 321 शव चितवन जिले से मिले हैं, जबकि नवलपरासी पूर्व जिले से 216 शव बरामद हुए हैं. नेपाल पुलिस के मुताबिक अभी भी 4606 लोग लापता हैं, इनमें 583 विदेशी नागरिक भी शामिल हैं. ऐसे में आने वाले दिनों में मृतकों की संख्या और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है. नेपाल सरकार के अनुरोध पर भारत और चीन ने भी बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है.
सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में मदद
दोनों देशों की तकनीकी टीमें भोटेकोशी और त्रिशूली नदी क्षेत्र की जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश में मदद कर रही हैं. इसके साथ ही भारत की 19 सदस्यीय फोरेंसिक टीम नेपाल के विशेषज्ञों के साथ मिलकर डीएनए नमूनों की जांच कर रही है. इसका मकसद बाढ़ में मारे गए लोगों की पहचान करना है, ताकि उनके परिवारों को सही जानकारी मिल सके और आगे की जरूरी प्रक्रिया पूरी की जा सके.
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