Iran: पाकिस्तान और सऊदी अरब ने कुछ महीनों पहले जो रक्षा समझौता किया था, उसमें अब तुर्की भी शामिल हो गया है. शुक्रवार को तीनों देशों के बीच एग्रीमेंट पर साइन हुए और इसे इस्लामिक नाटो करार दिया जा रहा है. इस समझौते के तहत पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब में से किसी पर कोई हमला होता है तो सभी हमला पर माना जाएगा और तीनों मिलकर उसका उत्तर देंगे. इस बीच ईरान ने ही सऊदी अरब पर तंज कस दिया है.
ईरान के सांसद और राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति मामलों से जुड़े एक सदस्य इब्राहिम रेजाई ने सऊदी से कहा कि कागजी समझौता आपको बचा नहीं सकेगा. आपने वर्षो तक अमेरिका का साथ दिया इसके बाद भी आपकी सुरक्षा सुनिश्चित नहीं हो सकी है. ऐसे में तुर्की और पाकिस्तान से रक्षा समझौता करने से आप बच नहीं सकेंगे. अगर सऊदी अरब अपनी नीतियों में सुधार कर ले तो उसे सुरक्षा के लिए दूसरों से भीख नहीं मांगनी पड़ेगी.
मक्का में समझौता होने का क्या अर्थ
यह समझौता ऐसे वक्त में हुआ है, जब ईरान और अमेरिका के बीच जंग चल रही है. इस बीच ईरान ने कई बार सऊदी अरब को भी टारगेट किया है. यह एग्रीमेंट इसलिए भी अहम है क्योंकि तुर्की और सऊदी अरब को इस्लाम के अलग-अलग ध्रुवों के तौर पर देखा जाता रहा है. ऐसे में यदि दोनों देश साथ आए हैं तो यह अहम है. इस समझौते का प्रतीकात्मक महत्व भी है. यह समझौता इस्लाम में पवित्र माने जाने वाले मक्का शहर में हुआ है, जहां पैगंबर मोहम्मद का जन्म हुआ था. इस एग्रीमेंट की नाटो से इसलिए तुलना की जा रही है क्योंकि नाटो देशों के बीच सुरक्षा समझौता है. इसमें यदि किसी एक मुल्क पर हमला होता है तो सभी मिलकर लड़ते हैं और जंग में उतर जाते हैं.

