ईरान में अशांति के पीछे अमेरिका और इजरायल का हाथ, अब्बास अराघची बोले- हमारे पास है सबूत

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Iran Protest: ईरान में जारी हिंसक विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिका और ईरान के बीच आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला जारी है. इस बीच ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाया है. अराघची का कहना है कि ईरान के मौजूदा हालात के पीछे अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है.

दरअसल, ईरान में हिंसा शुरू होने के बाद अमेरिका ने कहा है कि यदि ईरानी सरकार ने प्रदर्शनकारियों को नुकसान पहुंचाया, तो अमेरिकी सेना ईरान पर स्ट्राइक करेगी. सोमवार को अराघची ने मीटिंग में कहा कि ईरान के पास ऐसे कई सबूत हैं जो दिखाते हैं कि देश में हाल की अशांति में अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है.

ट्रंप को देश में सैन्य दखल देने का बहाना

ईरानी विदेश मंत्री का यह बयान प्रदर्शनकारियों और अधिकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों के बाद आया है, जिसमें ईरानी सुरक्षा बलों और आम लोगों में से कई लोगों की मौत हो गई है. प्रदर्शन के दौरान देशभर में कई मस्जिदों, मेडिकल सेंटरों और दूसरी इमारतों में आग लगा दी गई है. अराघची के मुताबिक, देशभर में हो रहे विरोध प्रदर्शन हिंसक और खूनी हो गए ताकि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को देश में सैन्य दखल देने का बहाना मिल सके.

प्रदर्शन में दिखे कुछ हथियारबंद लोग

उन्होंने कहा, “हमारे पास ईरान में हाल के दिनों में हुई आतंकवादी कार्रवाइयों में अमेरिका और इजरायल के शामिल होने के कई दस्तावेज और सबूत हैं.”

अराघची ने आगे कहा कि “प्रदर्शन के दौरान कुछ हथियारबंद लोग भी नजर आए. तेहरान के पास ऐसे ऑडियो मैसेज रिकॉर्ड हैं, जिनमें कथित तौर पर आतंकवादी गुर्गों को प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाने, सुरक्षा और पुलिस बलों को निशाना बनाने और यहां तक कि शांतिपूर्वक रह रहे आम नागरिकों पर हमले के निर्देश दिए गए थे.”

कुछ गुर्गों को सीधे तौर पर मिल रही विदेशी शक्तियां

ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि “मारे गए कई लोगों को पीछे से गोलियां लगीं. तेहरान के पास इस बात के पक्के सबूत हैं कि कुछ गुर्गों को विदेशी ताकतों से सीधे आदेश मिले थे. इस बात का जीता-जागता सबूत है कि इन आतंकवादी कामों में अमेरिका और इजरायल का बड़ा हाथ है.”

अराघची ने यह भी दावा किया कि घुसपैठियों को इजराइल की मोसाद इंटेलिजेंस एजेंसी ने मदद की थी. उन्होंने कहा कि फारसी बोलने वाले मोसाद के गुर्गों ने इन विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ की थी.

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