ट्रंप के फैसले ने बढ़ाई ईरान की बेचैनी, खामेनेई ने दिया ‘दंगाइयों’ के खिलाफ सख्त कार्रवाई का आदेश

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Iran protest: ईरान में अर्थव्यवस्था को लेकर शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन ने अब हिंसक रूप ले लिया है. पिछले एक सप्ताह से जारी देश में उथल-पुथल के बीच ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सुरक्षा बलों को प्रदर्शनकारियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात कही है.

बता दें ईरान में तनाव उस वक्‍त और बढ़ गया जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी. साथ ही, वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो (जो ईरान के करीबी सहयोगी हैं) को पकड़ने का दावा किया.

“दंगाइयों को उनकी जगह दिखानी होगी”

वहीं, खामेनेई ने एक संबोधन में प्रदर्शनकारियों और दंगाइयों के बीच स्पष्ट अंतर करने की कोशिश की. उन्होंने कहा कि “अधिकारियों को शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों से बात करनी चाहिए, लेकिन दंगा करने वालों से बात करने का कोई फायदा नहीं है. उन्हें उनकी जगह दिखानी होगी.” इसके साथ ही उन्‍होंने दावा किया कि इजरायल और अमेरिका जैसी विदेशी ताकतें ईरान में अशांति फैला रही हैं. इस दौरान खामेनेई ने रियाल की गिरती कीमत के लिए भी “दुश्मनों” को जिम्मेदार ठहराया.

हिंसा में अब तक 10 की मौत

बता दें कि ईरान में खराब होती अर्थव्यवस्था और मुद्रा ‘रियाल’ की गिरती कीमत को लेकर भड़के विरोध-प्रदर्शनों 22 प्रांतों में प्रदर्शन फैल चुके हैं. वही, शनिवार रात हुई ताजा हिंसा में दो और लोगों की मौत के साथ कुल मृतकों की संख्या 10 पहुंच गई है. इसके अलावा, शिया मदरसों के गढ़ माने जाने वाले कोम शहर में एक ग्रेनेड फटने से एक व्यक्ति की मौत हो गई. सरकारी मीडिया का दावा है कि वह व्यक्ति लोगों पर हमला करने के लिए ग्रेनेड ले जा रहा था. वहीं, हरसिन में रिवोल्यूशनरी गार्ड की ‘बासिज’ विंग का एक सदस्य बंदूक और चाकू के हमले में मारा गया.

डोनाल्ड ट्रंप ने दी चेतावनी

दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार को चेतावनी दी थी कि यदि तेहरान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या की, तो अमेरिका उनकी मदद के लिए आगे आएगा. ट्रंप के इस बयान के कुछ देर बाद ही उनके द्वारा वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी की घोषणा ने ईरान के नेतृत्व को और अधिक चौकन्ना कर दिया. ईरानी अधिकारियों ने जवाबी कार्रवाई के रूप में मध्य पूर्व में तैनात अमेरिकी सैनिकों को निशाना बनाने की धमकी दी है.

2022 के बाद का सबसे बड़ा प्रदर्शन

आपको बता दें कि मानवाधिकार संगठनों के अनुसार कि 100 से अधिक स्थानों पर प्रदर्शन हो रहे हैं. हालांकि यह 2022 के महसा अमीनी विरोध प्रदर्शन जितना तीव्र नहीं है, लेकिन आर्थिक बदहाली और रियाल के ऐतिहासिक गिरावट ने आम जनता के गुस्से को चरम पर पहुंचा दिया है.

इसे भी पढें:-राष्ट्रपति मादुरो को लाया गया न्यूयॉर्क, कोर्ट में चलेगा नार्को-टेररिज्म का मुकदमा, वेनेजुएला पर होगा अमेरिका का दबदबा

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