Washington: ईरान के बार-बार धमकी और चेतावनी के बाद अमेरिका ने बेहद सख्त रुख अपनाया है. अमेरिकी विदेश मंत्रालय (स्टेट डिपार्टमेंट) ने ईरान को साफ शब्दों में चेतावनी दी है. कहा है कि ट्रंप को परखने की गलती न करे. अगर ईरानी शासन प्रदर्शनकारियों पर घातक बल का इस्तेमाल जारी रखता है तो अमेरिका मूकदर्शक बनकर नहीं बैठेगा. वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद इस चेतावनी को और गंभीरता से लिया जा रहा है. ईरान में जारी हिंसक दमन और देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के बीच अमेरिका के स्टेट डिपार्टमेंट की ओर से बयान जारी किया गया है.
अमेरिका के संकल्प को कमतर नहीं आंकना चाहिए
बयान में यह भी कहा गया है कि ईरानी शासन को अपने कदमों के नतीजों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए और ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका के संकल्प को कमतर नहीं आंकना चाहिए. इस समय ईरान के 100 से अधिक शहरों में विरोध-प्रदर्शन जारी हैं. महंगाई, बेरोज़गारी, आर्थिक बदहाली और धार्मिक-सामाजिक पाबंदियों के खिलाफ जनता सड़कों पर उतरी हुई है. हालात पर काबू पाने के लिए सरकार ने इंटरनेट और संचार सेवाएं बंद कर दी हैं लेकिन इसके बावजूद प्रदर्शन और अधिक उग्र होते जा रहे हैं.
प्रदर्शनकारियों को आतंकवादी तत्व बताकर कार्रवाई
मानवाधिकार संगठनों के मुताबिक सुरक्षा बलों की गोलीबारी और हिंसक कार्रवाई में बड़ी संख्या में आम नागरिक मारे गए हैं, जबकि हजारों को गिरफ्तार किया गया है. सरकार प्रदर्शनकारियों को विदेशी साज़िश और आतंकवादी तत्व बताकर कार्रवाई को जायज़ ठहरा रही है. अमेरिकी चेतावनी ऐसे समय आई है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले ही यह संकेत दे चुके हैं कि अगर ईरान में शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों की हत्या हुई तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई से पीछे नहीं हटेगा.
वॉशिंगटन अब केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं
हाल ही में वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद इस चेतावनी को और गंभीरता से लिया जा रहा है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि वॉशिंगटन अब केवल बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहना चाहता. इंटरनेट ब्लैकआउट, बढ़ती भीड़ और तेज़ होते दमन के बीच अमेरिका यह संकेत दे रहा है कि वह हालात पर करीबी नज़र रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर सीधी कार्रवाई भी कर सकता है.
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