अमेरिका-इजरायल जंग में AI की एंट्री, साइबर हमले के लिए चैटजीपीटी-जेमिनी का यूज कर रहा ईरान

Aarti Kushwaha
Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)

Iran using ChatGPT: अमेरिका और इजरायल के साथ जारी जंग में ईरान अब AI को भी ले आया है. दरअसल, ईरान अपनी इंटरनेट हैकिंग यानी साइबर ताकतों को बढ़ाने और दुनिया भर में झूठी खबरें वा अफवाहें फैलाने के लिए अमेरिका और यूरोप की कंपनियों द्वारा बनाए गए AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहा है.

हैकर्स बना रहे फेक प्रोफाइल

फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल को निशाना बनाने के लिए ईरान के हैकर्स ChatGPT और Gemini जैसे विदेशी AI टूल्स का इस्तेमाल कर रहे हैं. इन टूल्स की मदद से वे कंप्यूटरों को हैक करने वाले खतरनाक वायरस यानी मैलवेयर बना रहे हैं, लोगों को धोखा देने के लिए अरबी भाषा में फर्जी और फ्रॉड मैसेज लिख रहे हैं , साथ ही इंटरनेट पर असली दिखने वाली नकली प्रोफाइल तैयार कर रहे हैं, जिससे सामने वाले को उन पर पूरा भरोसा हो जाए और वे उनके जाल में फंस जाएं.

ऐसे बना रहे लोगों को निशाना

रिपोर्ट के अनुसार, हैकर्स नकली प्रोफाइल बनाकर बातचीत करते हैं और धीरे-धीरे पीड़ितों को अपना बचाव कम करने के लिए उकसाते हैं. इसके बाद वे नुकसान पहुंचाने वाले लिंक या रिक्वेस्ट भेजते हैं. खबरों के मुताबिक, इजरायल के लोगों के पास अचानक बहुत सारे धोखाधड़ी वाले ईमेल और टेक्स्ट मैसेज आने लगे हैं, इनमें से कुछ मैसेज तो ऐसे हैं, जिनमें लोगों को खुलेआम ईरान की खुफिया एजेंसी के लिए जासूसी करने या उनके साथ मिलकर काम करने का ऑफर दिया गया है.

इन चीजों में भी हो रहा एआई का यूज

  1. ईरान द्वारा AI के इस्तेमाल की खबरें केवल साइबर हमलों और ऑनलाइन घोटालों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि इलेक्ट्रोमैग्नेटिक युद्ध में मदद करने, युद्ध के मैदान में कमांड सेंटरों में फैसले लेने की प्रक्रिया को तेज करने और ड्रोन गाइडेंस व पानी के नीचे निशाना लगाने वाले सिस्टम को बेहतर बनाने के लिए भी किया जा रहा है.
  2. ईरान दुनिया भर के लोगों की सोच को बदलने और इंटरनेट पर अपना दबदबा बनाने के लिए भी AI का इस्तेमाल एक बड़े हथियार की तरह कर रहा है।
  3. इसके अलावा सरकार से जुड़े अकाउंट्स नियमित तौर पर AI से बने वीडियो शेयर करते हैं, जिनमें अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को निशाना बनाया जाता है और ऑनलाइन ईरानी विचारों को बढ़ावा दिया जाता है.
  4. अप्रैल में, YouTube ने ‘Explosive Media’ चैनल को बैन कर दिया था. आरोप था कि यह चैनल AI से बने कंटेंट का इस्तेमाल करके ट्रंप का मजाक उड़ाता था और ईरान के पक्ष वाले संदेशों को फैलाता था.
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