Islamic NATO Trump: अमेरिका-ईरान युद्ध के बाद से पश्चिम एशिया में सुरक्षा समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. हाल ही में सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने मिलकर नाटो जैसा रक्षा समझौता किया है, जिसके तहत यदि एक देश पर हमला होने पर बाकी देशों के साथ आने की बात कही गई है, जिसका अब अमेरिका ने भी खुलकर समर्थन किया है.
अब ‘मक्का जॉइंड डिफेंस एग्रीमेंट’ को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी ‘बड़ा, साहसिक और महत्वपूर्ण पहला कदम’ बताया और कहा कि इससे मिडिल ईस्ट एक साथ आ रहा है. बता दें कि अब इस संगठन में मिस्र को शामिल करने की बात भी हो रही है.
‘मक्का जॉइंड डिफेंस एग्रीमेंट’ पर ट्रंप ने जताई खुशी
ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में कहा कि यह देखकर बहुत खुशी हुई कि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान ने हाल ही में, और आखिरकार, मक्का जॉइंट डिफेंस एग्रीमेंट पर साइन कर लिया है. इससे पता चलता है कि पश्चिम एशिया के देश एक साथ आ रहे हैं और देश आखिरकार ज़्यादा असरदार तरीके से अपनी सुरक्षा कर पाएंगे. इन तीनों देशों के शानदार नेतृत्व को बधाई. यह एक बड़ा, साहसी और अहम पहला कदम है! वाह!’
किसी एक पर अटैक, तीनों पर माना जाएगा
बता दे कि 7 अगस्त को तीनों देशों के बीच हुए समझौते की सबसे अहम शर्त यह है कि अगर तीनों में से किसी एक देश पर सशस्त्र हमला होता है, तो उसे तीनों देशों पर हमला माना जाएगा. यह व्यवस्था ठीक NATO के Article 5 से मिलती जुलती है. इस समझौते पर सऊदी क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान, तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगन और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने हस्ताक्षर किए हैं. हालांकि अभी इसका नाटो की तरह कोई मिलिट्री स्ट्रक्चर नहीं बन पाया है.
आखिर इस डील से क्यों खुश हैं ट्रंप?
इस दौरान सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर ट्रंप इस समझौते से खुश क्यों हैं. दरअसल, अमेरिका आमतौर पर अपने प्रभाव वाले इलाके में किसी नए सैन्य संगठन को बेहद चिंता के साथ देखता है. लेकिन तुर्की-सऊदी और पाकिस्तान के समझौते से ट्रंप खुश हैं. इसकी एक वजह बर्डन-शेयरिंग यानी सुरक्षा का बोझ सहयोगी देशों के बीच बांटना हो सकती है.
यदि सऊदी अरब, तुर्की और पाकिस्तान अपनी सामूहिक सुरक्षा क्षमता बढ़ाते हैं तो अमेरिका पर पश्चिम एशिया में सुरक्षा का सैन्य और आर्थिक बोझ कम हो सकता है. इसके अलावा तीनों देश अमेरिका के पुराने साझेदार हैं. इसलिए यह गठजोड़ अमेरिका के लिए किसी प्रतिद्वंद्वी शक्ति के नए गुट की तरह नहीं दिखता. इस बीच ट्रंप ने भी कहा कि इससे क्षेत्र के देश अपनी रक्षा ‘ज्यादा सार्थक तरीके’ से कर सकेंगे. वहीं क्योंकि इसमें रूस या चीन नहीं है, इसलिए भी अमेरिका ज्यादा परेशान नहीं दिखता.

