Washington: इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिका-ईरान बातचीत में सिर्फ न्यूक्लियर मुद्दा नहीं बल्कि ईरान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक, मिडिल ईस्ट में ईरान समर्थित मिलिशियाओं (हिज़्बुल्लाह, हमास, इस्लामिक जिहाद, हूती) को समर्थन खत्म करने की शर्त और तेहरान पर कड़े अल्टीमेटम लगाए जाएं.
वॉशिंगटन पहुंचे नेतन्याहू
यानी साफ शब्दों में ईरान को बातचीत नहीं, आत्मसमर्पण पर मजबूर किया जाए. इसी बीच नेतन्याहू मंगलवार रात वॉशिंगटन पहुंचे वह भी उस स्तर की सुरक्षा के साथ जैसी आमतौर पर अमेरिकी राष्ट्रपति को दी जाती है. आज उनकी मुलाकात राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से होनी है और कूटनीतिक हलकों में इसे बेहद संवेदनशील और खतरनाक मोड़ माना जा रहा है.
चर्चा सिर्फ ईरान के परमाणु कार्यक्रम तक सीमित
यह दौरा पहले अगले हफ्ते तय था लेकिन नेतन्याहू ने इसे जल्द कराने पर ज़ोर दिया, जब ट्रंप के दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुशनर ने ओमान में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से बातचीत की. उस बातचीत में दोनों पक्षों ने माना कि चर्चा सिर्फ ईरान के परमाणु कार्यक्रम तक सीमित है यही बात नेतन्याहू को नागवार गुज़री.
ट्रंप और नेतन्याहू की 7वीं आमने-सामने मुलाकात
यह बीते 12 महीनों में ट्रंप और नेतन्याहू की 7वीं आमने-सामने मुलाकात है जो किसी भी वैश्विक नेता से कहीं ज्यादा. नेतन्याहू इसे श्अभूतपूर्व रिश्ता बताते हैं. उन्होंने यहां तक कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री न होते तो शायद आज इजरायल अस्तित्व में ही न होता. राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक नेतन्याहू ट्रंप के साथ अपनी निजी केमिस्ट्री का इस्तेमाल कर विटकॉफ और कुशनर की अपेक्षाकृत नरम नीति को कमजोर करना चाहते हैं.
नेतन्याहू को बातचीत की शर्तें तय न करने दे अमेरिका
ईरान ने भी इस दबाव को भांप लिया है. ईरान की सुप्रीम नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल के सचिव अली लारीजानी ने अमेरिका को चेताया कि वह नेतन्याहू को बातचीत की शर्तें तय न करने दे. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि अमेरिका को ज़ायोनिस्ट ताकतों की विनाशकारी भूमिका से सतर्क रहना चाहिए.
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