ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह सुरक्षित’, खुफिया रिपोर्ट के इस दावे पर आया ट्रंप का जवाब

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Israel-Iran war: ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिकी हमला सफल रहा या नहीं, अब इसको लेकर अमेरिकी एजेंसियों और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में ही ठन गई है. अमेरिका के रक्षा मंत्रालय के हेडक्वाटर, पेंटागन ने हमले का खुफिया प्रारंभिक आकलन किया है. इसके अनुसार ईरान के परमाणु ठिकानों पर हुए अमेरिकी हमलों ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को नष्ट नहीं किया और शायद केवल इसे कुछ महीनों पीछे ही धकेला है.

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने उन खुफिया आकलनों के रिपोर्ट पर विरोध जताया है जिनमें ईरान के परमाणु ठिकानों को नष्ट करने के अमेरिकी सरकार के दावों पर संदेह जताया गया है.

सैन्य हमले को नीचा दिखाने की कोशिश-ट्रंप

राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उन अखबारों का नाम लेते हुए सोशल मीडिया एक्स पर लिखा-इतिहास के सबसे सफल सैन्य हमलों में से एक को नीचा दिखाने की कोशिश की जा रही है. ईरान में परमाणु स्थल पूरी तरह से नष्ट हो गए. दोनों को जनता द्वारा कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है.

दरअसल, अमेरिका के इन दो बड़े अखबारों ने एक खुफिया रिपोर्ट के आकलन के आधार पर अमेरिकी सरकार द्वारा ईरान में लिए गए एक्शन पर सवाल उठाया था. इस रिपोर्ट के मुताबिक ट्रंप प्रशासन द्वारा ईरान में न्यूक्लियर ठिकानों पर बमबारी कर उसे पूरी तरह से नष्ट करने की खबर सही नहीं है. ईरान के परमाणु ठिकाने पूरी तरह से नेस्तनाबूत नहीं हुए हैं. इसके बाद से ही ट्रंप प्रशासन के दावों पर सवाल उठने लगे. अब इस पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी बात रखी है.

राष्ट्रपति को बदनाम करने की कोशिश

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने कहा कि ‘खुफिया रिपोर्ट लीक होना राष्ट्रपति ट्रंप को बदनाम करने की साजिश है. साथ ही उन बहादुर फाइटर पायलट का क्रेडिट लेने की कोशिश है, जिन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को पूरी तरह से तबाह कर दिया.’ लेविट ने कहा कि ‘सभी जानते हैं कि जब 30,000 पाउंड के 14 बम निशाने पर गिरते हैं तो क्या होता है- पूरी तरह से विनाश.’

राष्ट्रपति ट्रंप का दावा

बता दें कि 22 जून को अमेरिका ने ईरान के तीन बड़े परमाणु ठिकानों को निशाना बनाकर एक बड़ा हमला किया था. राष्ट्रपति ट्रंप ने दावा किया था कि  ईरान के फोर्दो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों पर बमबारी कर उन्हें नष्ट कर दिया है. बाद में ईरान ने भी इस दावे की पुष्टि करते हुए कहा था कि उसके तीन परमाणु ठिकानों पर हमला हुआ है.

ट्रंप और खूफिया एजेंसी के अलग-अलग दावे

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस सप्ताह जानकारी दी कि अमेरिका द्वारा जिन ईरानी साइटों पर बमबारी की गई, वे “परमाणु हथियार विकास कार्यक्रम” से जुड़े थे. हालांकि अमेरिकी जासूसी एजेंसियों ने कहा है कि ऐसा कोई कार्यक्रम मौजूद नहीं था. यानी ईरान परमाणु हथियार नहीं बना रहा था.

ट्रंप और एजेंसी के इन अलग-अलग दावे ने सवाल उठाया है कि क्या अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ईरान पर हमले का आदेश देने के उनके फैसले का समर्थन किया था या नहीं.

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