क्षेत्रीय तनाव या किसी देश का दबाव…क्‍यों फिलिस्तीन को मान्यता देने के अपने फैसले से पीछे हटा जापान

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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Japan on Palestine: फिलिस्तीन को एक राज्य के तौर पर मान्यता देने वाले अपने फैसले पर जापान ने यू-टर्न ले लिया है. 22 सितंबर को एक ओर जहां ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देश संयुक्त राष्ट्र महासभा में फिलिस्तीन को मान्यता देने जा रहे हैं, वहीं जापान ने इससे दूरी बना ली है. ऐसे में सवाल अब ये है कि आखिर जापान के पहले हां और अब ना के पीछे की वजह क्‍या है.

क्‍या है जापान के पलटने की वजह?

अमेरिका के साथ रिश्‍ता: दरअसल, सुरक्षा और आर्थिक मामलों में जापान के लिए अमेरिका अहम साझेदार है. ऐसे में मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, टोक्यो का ये फसला अमेरिका के दबाव में लिया गया है. रिपोर्ट का कहना है कि अमेरिका ने कई चैनलों के जरिए जापान पर दबाव डाला कि वो फिलिस्तीन को मान्यता न दे.

इजराल की प्रतिक्रिया: जापान, इजरायल के साथ भी संबंधों को बरकरार रखना चाहता है, वो नहीं चाहता कि अचानक मान्यता देने से इजराइल और सख्त रुख अपनाए. रिपोर्ट में दावा भी किया गया है कि इजरायल के रवैये को नरम बनाए रखने की रणनीति का हिस्सा है.

समय की राजनीति: दरअसल, फिलिस्तीन की मान्यता को लेकर सात बड़े औद्योगिक देशों (जी-7) के भीतर भी मतभेद हैं. इस दौरान इटली और जर्मनी ने स्‍पष्‍ट रूप से कहा है कि तुरंत मान्यता देना उल्टा असर डालेगा. ऐसे में जापान ने भी एहतियात बरतते हुए अपने कदम रोक लिए हैं.

क्‍या है जापान के पीएम की रणनीति

रिपोर्ट के मुताबिक, जापान के प्रधानमंत्री शिगेरू इशिबा ने भी संकेत दिए हैं कि उनकी सरकार फिलहाल इस मुद्दे से दूरी बनाए रखेगी और यही वजह है कि वो 22 सितंबर को न्यूयॉर्क में होने वाली उस अहम बैठक में शामिल नहीं होंगे, जहां इजरायल और फिलिस्तीन के बीच दो-राष्ट्र समाधान पर चर्चा होगी. दरअसल, जापान का मानना है कि इस समय मान्यता देना जल्दबाजी होगी और इससे क्षेत्रीय तनाव और बढ़ सकता है.

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