अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दामाद और मध्य-पूर्व मामलों के दूत जेरेड कुशनर ने गाजा में शांति बहाली की कोशिशों के बीच अहम बैठकें की हैं. सोमवार को उन्होंने हमास चीफ खलील अल-हया से मुलाकात की. इसके बाद कुशनर ने इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ करीब चार घंटे तक बातचीत की. इस दौरान गाजा के पुनर्निर्माण, वहां के विसैन्यीकरण और इजरायल की सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई.
नेतन्याहू के साथ बैठक में क्या निकला?
बैठक खत्म होने के बाद कुशनर ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में बातचीत को सकारात्मक बताया. उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान नेतन्याहू और उनकी टीम की ओर से उठाई गई कई चिंताओं पर विस्तार से बात हुई. साथ ही प्रस्तावित योजना को लेकर सामने आई गलतफहमियों और गलत जानकारियों को भी स्पष्ट किया गया. कुशनर ने कहा, “आज हमारी बहुत अच्छी बैठक हुई. हम उनके और उनकी टीम के साथ लगभग चार घंटे तक रहे और सभी अलग-अलग विवरणों पर चर्चा की.”
अमेरिकी दूत के मुताबिक, इजरायली पक्ष की कुछ चिंताएं ऐसी थीं जिनका बैठक में समाधान किया गया. उन्होंने कहा, “मुझे लगता है कि उन्होंने कुछ सही चिंताएं जताई थीं जिनका हमने समाधान किया, और हमने उन गलतफहमियों और गलत जानकारियों को भी दूर किया जो इस बारे में फैली हुई थीं.”
डिमिलिटराइजेशन के बाद ही शुरू होगा पुनर्निर्माण
गाजा के पुनर्निर्माण को लेकर कुशनर ने अमेरिका की प्रतिबद्धता दोहराई, लेकिन साथ ही इसकी एक अहम शर्त भी बताई. उन्होंने कहा कि जब तक गाजा से हथियार नहीं हटाए जाते और डिमिलिटराइजेशन नहीं होता, तब तक पुनर्निर्माण का काम शुरू नहीं किया जाएगा. कुशनर ने कहा, “हम गाजा के पुनर्निर्माण की योजना को लेकर बहुत प्रतिबद्ध हैं, लेकिन जब तक डिमिलिटराइजेशन नहीं हो जाता, हम गाजा का पुनर्निर्माण नहीं होने देंगे.” उन्होंने इसकी वजह बताते हुए कहा, “कोई भी ऐसी जगह पर और पैसा नहीं लगाना चाहता जहां लंबे समय से संघर्ष चल रहा हो, अगर उस जगह पर आतंकवादी कब्जा कर लें या उसे फिर से उड़ा दिया जाए.”
इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार पर नहीं लगेगी रोक
कुशनर ने प्रस्तावित योजना को लेकर इजरायल की सुरक्षा चिंताओं पर भी बात की. उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी संभावित खतरे की स्थिति में इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को सीमित नहीं किया जाएगा. उन्होंने कहा, “अगर कोई खतरे की संभावना होती है तो हम इजरायल के आत्मरक्षा के अधिकार को भी सीमित नहीं करेंगे, और इसलिए हमें यह स्पष्ट करना पड़ा कि इसका क्या मतलब है.” उन्होंने बताया कि योजना के तहत अगले 30 दिनों के भीतर प्रगति दिखाई दे सकती है. इसमें गाजा से हथियार हटाने के प्रयास शुरू होने की उम्मीद है. वहीं, सुरंगों के नेटवर्क से निपटने में 60 से 90 दिन का समय लग सकता है.
30 दिनों में शुरू हो सकता है हथियार हटाने का काम
अमेरिकी दूत ने उम्मीद जताई कि गाजा में जल्द ही योजना के शुरुआती चरणों पर काम आगे बढ़ सकता है. उन्होंने कहा कि 30 दिनों के भीतर हथियार हटाए जाने की शुरुआत देखने को मिल सकती है, जबकि इसके बाद 60 से 90 दिनों में कुछ सुरंगों को बंद करने की दिशा में प्रगति संभव है. कुशनर ने कहा, “उम्मीद है कि हमें जल्द ही, यानी 30 दिनों के अंदर ही, कुछ प्रगति देखने को मिल सकती है. जैसे कि कुछ हथियार हटाए जाने लगें, और अगले 60 से 90 दिनों में कुछ सुरंगों को भी बंद किया जा सके.”
हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि योजना को सफल बनाने के लिए दोनों पक्षों का सहयोग जरूरी होगा. कुशनर ने कहा, “प्रगति जल्द ही हो सकती है, लेकिन हमें दोनों पक्षों के सहयोग की जरूरत है, और उम्मीद है कि हम इसे पूरा कर लेंगे. लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए हमने काफी प्रगति की है.”
कुशनर ने इसे बताया ‘विन-विन सिचुएशन’
कुशनर के मुताबिक, प्रस्तावित योजना इजरायल के लिए एक संभावित “विन-विन सिचुएशन” हो सकती है. उनका कहना है कि यदि हमास खुद हथियार और सुरंगें सौंप देता है, तो इससे इजरायल के सामने मौजूद एक बड़े सुरक्षा खतरे को खत्म किया जा सकता है. उन्होंने कहा, “हमें लगता है कि इजरायल के लिए यह एक ‘विन-विन सिचुएशन’ है, क्योंकि अगर हमास सच में अगले 60 से 90 दिनों में अपनी मर्जी से हथियार और सुरंगें सौंप देता है, तो जाहिर है कि इससे इजरायल के लिए सुरक्षा का एक बहुत बड़ा खतरा खत्म हो जाएगा, यह एक ऐसी उपलब्धि होगी जिसकी कल्पना भी नहीं की जा सकती.”