Maldives-Pakistan Relations: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू 20 से 22 अक्टूबर तक पाकिस्तान के दौरे पर रहेंगे. एक दशक से अधिक समय बाद मालदीव के किसी राष्ट्रपति की यह पहली पाकिस्तान यात्रा होगी. प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के न्योते पर हो रहे इस दौरे में व्यापार, निवेश, पर्यटन और क्षेत्रीय सहयोग पर बातचीत होगी. कई समझौतों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. लेकिन इस दौरे पर भारत की नजर भी रहेगी, क्योंकि हिंद महासागर में मालदीव की भौगोलिक स्थिति भारत की समुद्री सुरक्षा के लिहाज से बेहद अहम है.
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Mohamed Muizzu
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हालांकि, ये नहीं कहा जा सकता कि मुइज्जू का पाकिस्तान दौरा भारत के खिलाफ किसी नई रणनीति का हिस्सा है. छोटे देश अक्सर अपनी आर्थिक और कूटनीतिक जरूरतों के लिए कई देशों के साथ संबंध रखते हैं. इससे उन्हें निवेश, व्यापार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के नए विकल्प मिलते हैं.
मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय के मुताबिक, मुइज्जू पाकिस्तान में प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के साथ द्विपक्षीय बातचीत करेंगे. इसके अलावा वह राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से भी मुलाकात करेंगे. दोनों देशों के बीच 1966 में राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे. इस साल उनके रिश्तों के 60 साल पूरे हो रहे हैं. बैठकों में व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, पर्यटन, कृषि और दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर चर्चा होगी.
इसके अलावा, पाकिस्तान-मालदीव बिजनेस फोरम भी आयोजित किया जाएगा, ताकि कारोबारी रिश्तों को मजबूत किया जा सके. मालदीव के राष्ट्रपति कार्यालय के अनुसार, यात्रा के दौरान सहयोग के अलग-अलग क्षेत्रों में कई समझौतों और सहमति पत्रों पर हस्ताक्षर होने की उम्मीद है. फिलहाल, इन समझौतों का पूरा ब्योरा सामने नहीं आया है.
मालदीव जहां है, वहां से अंतरराष्ट्रीय व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के महत्वपूर्ण समुद्री रास्ते गुजरते हैं. इसलिए यहां सुरक्षा सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण, निगरानी और बंदरगाहों से जुड़े किसी भी समझौते का रणनीतिक महत्व हो सकता है. हालांकि मालदीव अभी भी ऐसा कोई समझौता नहीं करने जा रहा, जो पाकिस्तान को बढ़त दे और भारत की सुरक्षा को सीधा खतरा पैदा हो.
मुइज्जू ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन यानी SAARC की लंबे समय से रुकी प्रक्रिया को फिर शुरू करने की बात कही है. इस संगठन में भारत और पाकिस्तान दोनों शामिल हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव के कारण क्षेत्रीय सहयोग प्रभावित होता रहा है. अगर SAARC को फिर सक्रिय करने की कोशिश होती है, तो यह दक्षिण एशिया के देशों के बीच बातचीत का अवसर बन सकती है. लेकिन पाकिस्तान के कारण भारत से सहमति नहीं बन पाई है.