ऑस्ट्रेलिया- भारत के मजबूत रिश्तों ने बढाई चीन की टेंशन, सैन्य और समुद्री ताकत पर मिल रही चुनौती

New Delhi: आज ऑस्ट्रेलिया सिर्फ भारत का आर्थिक साझेदार नहीं, बल्कि चीन के बढ़ते प्रभाव को संतुलित करने वाली पूरी रणनीति का अहम केंद्र बन चुका है. वहीं पीएम मोदी अमेरिका के अलावा दूसरे सहयोगियों से हिंद-प्रशांत क्षेत्र में करीबी बढ़ा रहे हैं. यही वजह है कि भारत के लिए ऑस्ट्रेलिया के साथ रिश्ते सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं हैं. समुद्री सुरक्षा, रक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, नई तकनीक और क्षेत्रीय रणनीति तक दोनों देशों की साझेदारी लगातार गहरी होती जा रही है. ऑस्ट्रेलिया का बढ़ता महत्व चीन के लिए टेंशन की बात हैं.

समूह का मकसद नियम आधारित व्यवस्था

इंडो-पैसिफिक में चीन लगातार अपनी सैन्य और समुद्री ताकत बढ़ा रहा है. इसके खिलाफ अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया ने QUAD को बनाया. इस समूह का मकसद नियम आधारित व्यवस्था, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और जहाजों की स्वतंत्र आवाजाही को बनाए रखना है. इस पूरे ढांचे में ऑस्ट्रेलिया की खास भूमिका है. प्रशांत महासागर के दक्षिण में वह अमेरिका और उसके सहयोगियों का सबसे मजबूत रणनीतिक आधार माना जाता है.

अमेरिका का औपचारिक सैन्य सहयोगी

वहीं भारत QUAD का इकलौता सदस्य है, जो चीन के बॉर्डर शेयर करता है और अमेरिका का औपचारिक सैन्य सहयोगी भी नहीं है. ऐसे में ऑस्ट्रेलिया भारत के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बन जाता है. अगर QUAD राजनीतिक साझेदारी है, तो AUKUS सैन्य शक्ति का सबसे बड़ा प्रतीक माना जाता है. अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया के बीच बने इस समझौते के तहत ऑस्ट्रेलिया को परमाणु ऊर्जा से चलने वाली अत्याधुनिक पनडुब्बियां मिलेंगी.

वर्जीनिया क्लास पनडुब्बियां मिलनी शुरू

योजना के मुताबिक 2032 से 2035 के बीच उसे वर्जीनिया क्लास पनडुब्बियां मिलनी शुरू होंगी, जबकि इसके बाद नई SSN-AUKUS पनडुब्बियां भी शामिल होंगी. इससे ऑस्ट्रेलिया दुनिया के चुनिंदा परमाणु पनडुब्बी संचालित देशों में शामिल हो जाएगा. एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इससे दक्षिण चीन सागर में चीन की नौसैनिक गतिविधियों को सीधी चुनौती मिलेगी.

सबसे मजबूत खुफिया नेटवर्क का सदस्य

ऑस्ट्रेलिया की सबसे बड़ी ताकत सिर्फ उसकी सेना नहीं है. वह Five Eyes नाम के दुनिया के सबसे मजबूत खुफिया नेटवर्क का भी सदस्य है. इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, न्यूजीलैंड और ऑस्ट्रेलिया शामिल हैं. यह गठजोड़ रीयल-टाइम खुफिया जानकारी, साइबर सुरक्षा, सिग्नल इंटेलिजेंस और तकनीकी निगरानी साझा करता है. ऑस्ट्रेलिया सूचना और खुफिया नेटवर्क के जरिए पश्चिमी देशों की सुरक्षा रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है.

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