NATO not there need them : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) को एक बार फिर कड़ी धमकी दी है. ऐसे में उन्होंने कहा कि “नाटो हमारे काम नहीं आया जब हमें उनकी जरूरत थी, और अगर हमें फिर से उनकी जरूरत पड़ी तो वे तब भी नहीं होंगे. ग्रीनलैंड याद रखो- वो बड़ा बर्फ का एक टुकड़ा बुरे तरीके से चलाया जा रहा!” बता दें कि ट्रंप की इस धमकी ने नाटो महासचिव को असहज कर दिया.
प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रंप ने नाटो महासचिव मार्क रूट के साथ बंद कमरे में यह बैठक की थी, जिसके बाद उन्होंने नाटो के प्रति अपनी शिकायत और कड़ी नाराजगी दोहराई. बता दें कि इस बैठक से पहले जब ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को प्रभावी रूप से बंद कर दिया और गैस की कीमतें आसमान छूने लगीं तो उस समय ट्रंप ने संकेत देते हुए कहा कि अगर नाटो के सदस्य देशों ने उनके आह्वान को नजरअंदाज किया तो अमेरिका नाटो से बाहर निकलने पर विचार कर सकता है. फिलहाल व्हाइट हाउस ने तुरंत इस पर कोई और अपडेट नहीं दिया.
फिर से होर्मुज को खोलने का प्रावधान
प्राप्त जानकारी के अनुसार ट्रंप ने मार्क रूट के बीच यह बैठक मंगलवार देर रात अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्ते के सीजफायर (युद्धविराम) पर सहमति बनने के बाद हुई, बता दें कि इसमें होर्मुज को फिर से खोलने का भी प्रावधान है. जानकारी के मुताबिक, यह नया सीजफायर ट्रंप के उस बयान के बाद हुआ, जिसमें उन्होंने कहा था कि अगर जरूरत पड़ी तो वह ईरान के पावर प्लांट और पुलों पर हमला करेंगे. इसके साथ ही उन्होंने यह भी धमकी दी कि “आज रात पूरी सभ्यता मिट जाएगी.”
1949 में नाटो की स्थापना
मीडिया रिपोर्ट के दौरान पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन के कार्यकाल में कांग्रेस ने 2023 में एक कानून पास किया था, जिसमें किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति को नाटो से बाहर निकलने के लिए कांग्रेस की मंजूरी जरूरी कर दी गई है. बता दें कि ट्रंप लंबे समय से नाटो के आलोचक रहे हैं और अपने पहले कार्यकाल में उन्होंने कहा था कि उनके पास अकेले ही नाटो से बाहर निकलने का अधिकार है. बता दें कि नाटो की स्थापना 1949 में सोवियत संघ के खतरे के खिलाफ यूरोपीय सुरक्षा के लिए की गई थी. बताया जा रहा है कि नाटो के 32 सदस्य देशों का मुख्य वादा आपसी रक्षा समझौता है, जिसमें एक पर हमला सभी पर हमला माना जाता है. इसके बावजूद ट्रंप ने ईरान के साथ अपने युद्ध को लेकर शिकायत की कि नाटो अमेरिका के साथ नहीं खड़ा हुआ.
नाटो के रुख को लेकर ट्रंप ने जताई नारजगी
जानकारी के मुताबिक, ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर नाटो के रुख को लेकर कड़ी नाराजगी जताई है. इसके साथ ही ग्रीनलैंड नाटो सदस्य डेनमार्क का एक अर्ध-स्वायत्त क्षेत्र है. बता दें कि ट्रंप ने इस साल की शुरुआत में ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण की मांग की थी, लेकिन कुछ ही दिनों बाद रूट के साथ बातचीत के बाद पीछे हट गए थे. ऐसे में यह पूरी तरह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप प्रशासन उस कानून को चुनौती देगा या नहीं जो राष्ट्रपति को नाटो से बाहर निकलने से रोकता है.
अमेरिकी प्रयासों को नाटो सहयोगियों के साथ साझा करने” पर चर्चा
जब यह कानून पास हुआ था, तब इसका समर्थन ट्रंप के वर्तमान विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने किया था, जो उस समय फ्लोरिडा के सीनेटर थे. मीडिया रिपोर्ट का कहना है कि रुबियो और रूट ने ईरान युद्ध, रूस-यूक्रेन युद्ध को खत्म करने के अमेरिकी प्रयासों और “नाटो सहयोगियों के साथ बढ़ते समन्वय तथा बोझ साझा करने” पर चर्चा की.
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