‘युद्ध की खुली तैयारी’, ईरान जंग के बीच नया बवाल, NATO के फैसले से भड़का उत्तर कोरिया

Aarti Kushwaha
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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NATO vs North Korea: रूस-यूक्रेन और अमेरिका-ईरान जंग अभी चल ही रही थी कि तीसरे युद्ध की भी आहट सुनाई देने लगी है. दरअसल, उत्तर कोरिया लगातार अपनी सैन्य ताकत बढ़ाने में लगा है. हाल ही में उसने कई लंबी दूरी के मिसाइलों का परीक्षण भी किया. इन्ही सबके बीच, नॉर्थ अटलांटिक ट्रीटी ऑर्गेनाइजेशन (NATO) ने कुछ ऐसा फैसला लिया है, जिससे वो खफा होता हुआ नजर आ रहा है.

NATO की हाल ही में स्वीकृत ‘फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान’ की कड़ी आलोचना करते हुए उत्तर कोरिया ने इसे युद्ध की पूरी तैयारी और गठबंधन के अधिक आक्रामक सैन्य गुट में बदलने का प्रमाण बताया है. नॉर्थ कोरियाई मीडिया की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब NATO ने पिछले महीने ‘फ्यूल सप्लाई चेन कैपेबिलिटी प्रोग्राम प्लान को मंजूरी दी. इस योजना का उद्देश्य यूरोप में शीत युद्ध काल के सैन्य ईंधन पाइपलाइन और स्‍टोरेज नेटवर्क का आधुनिकीकरण और विस्तार करना है.

NATO की सैन्य गतिविधियों पर उत्तर कोरिया की नजर

मीडिया के अनुसार, यह टिप्पणी संकेत देती है कि यूक्रेन युद्ध में रूस के समर्थन के लिए अपने सैनिक भेजने वाले उत्तर कोरिया की नजर अब NATO की सैन्य गतिविधियों पर लगातार बनी हुई है. वहीं NATO यूक्रेन को सैन्य सहायता देना जारी रखे हुए है.  हालांकि शुरुआत में सदस्य देशों के बीच भारी लागत को लेकर मतभेद थे, लेकिन आखिरकार उन्हें दूर कर लिया गया. इससे स्पष्ट होता है कि नाटो युद्ध के लिए रणनीतिक ईंधन भंडार को अत्यंत महत्वपूर्ण मानते हुए उस पर जोर दे रहा है.’

उत्‍तर कोरिया का दावा

इस बीड, उत्तर कोरिया ने यह भी दावा किया कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया NATO की इस योजना को रूस के साथ युद्ध की तैयारी के रूप में देख रहा है. केसीएनए का कहने है कि इस पहल का वास्तविक उद्देश्य भविष्य के संघर्षों के लिए ईंधन और अन्य सैन्य सामग्री का बड़े पैमाने पर भंडारण करना है. अर्थात NATO की मंशा पर्याप्त ईंधन और अन्य युद्ध सामग्री जमा कर दुनिया के किसी भी हिस्से में कभी भी युद्ध की आग भड़काने की है.
बता दें कि NATO की स्थापना के बाद कई दशक बीत चुके हैं, लेकिन उसने पहले कभी इतनी खुली तरह युद्ध की तैयारी नहीं की थी. उत्तर कोरिया ने NATO पर एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का भी आरोप लगाया. उसके अनुसार, गठबंधन “डीपीआरके (उत्तर कोरिया) के प्रति शत्रुतापूर्ण देशों के साथ मिलकर कोरियाई प्रायद्वीप के आसपास लगातार उकसावे वाले सैन्य प्रदर्शन करता है.

सैन्‍य अभ्‍यास का हवाला

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