IEA Energy Plan: कोविड के बाद दुनिया में सबसे बड़े ‘लॉकडाउन’ की आहट, इस संकट से कैसे बचेगा भारत?

Shivam
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Reporter The Printlines (Part of Bharat Express News Network)
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IEA Energy Plan: कोरोना महामारी के करीब छह साल बाद दुनिया एक नए तरह के संकट की ओर बढ़ती नजर आ रही है. इस बार खतरा किसी वायरस से नहीं, बल्कि ऊर्जा आपूर्ति से जुड़ा है. ईरान से जुड़े युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य में आपूर्ति बाधित होने के कारण वैश्विक स्तर पर तेल संकट गहराता जा रहा है.

तेल की सप्लाई प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं और कई देशों में ईंधन की कमी के चलते राशनिंग जैसे कदम उठाए जा रहे हैं.

IEA की 10 सूत्री योजना, ‘एनर्जी लॉकडाउन’ की चर्चा

अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने इस संकट से निपटने के लिए 10 सूत्रीय योजना जारी की है. इसमें ऊर्जा की मांग कम करने के लिए कई सख्त उपाय सुझाए गए हैं, जिन्हें लोग ‘एनर्जी लॉकडाउन’ का नाम दे रहे हैं. इस योजना के तहत गाड़ियों के उपयोग पर नियंत्रण, यात्रा में कमी और ऊर्जा बचत को प्राथमिकता देने जैसे कदम शामिल हैं.

क्या हैं IEA के प्रमुख सुझाव

IEA की योजना में कुछ अहम उपाय शामिल हैं:

  • नंबर प्लेट के आधार पर गाड़ी चलाने के दिन तय करना
  • हाईवे पर वाहनों की गति सीमा कम करना
  • हवाई यात्राओं में कटौती
  • वर्क फ्रॉम होम को बढ़ावा
  • गैस की जगह बिजली के उपयोग को बढ़ाना

अगर ये उपाय लागू होते हैं, तो आम लोगों की दिनचर्या पर कोविड लॉकडाउन जैसा असर पड़ सकता है.

दुनिया भर में दिखने लगा असर

तेल संकट का असर अब कई देशों में साफ दिखाई देने लगा है. अमेरिका में पेट्रोल की कीमत 5 डॉलर प्रति गैलन तक पहुंच गई है. जापान में सरकार ऊर्जा वाउचर बांट रही है.

दक्षिण कोरिया, बांग्लादेश, फिलीपींस और श्रीलंका जैसे देशों में पेट्रोल पंपों पर लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं. वहीं ऑस्ट्रेलिया ने गैर-जरूरी यात्राएं कम करने की सलाह दी है और कई एयरलाइंस ने उड़ानों में कटौती शुरू कर दी है.

तेल की कीमतें 112 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच चुकी हैं, जो वैश्विक बाजार में दबाव को दर्शाता है.

भारत पर भी मंडरा रहा असर

भारत भी इस संकट से अछूता नहीं है. देश का लगभग 80 प्रतिशत तेल आयात होर्मुज जलडमरूमध्य के रास्ते आता है. ऐसे में आपूर्ति बाधित होने का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है. इसके साथ ही खाद्य आपूर्ति पर भी असर पड़ने की आशंका है, क्योंकि वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है.

स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ सकता है असर

यह संकट भले ही सीधे स्वास्थ्य से जुड़ा न हो, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव गंभीर हो सकता है. ईंधन और बिजली की कमी से अस्पतालों की सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं.

दवाइयों और जरूरी सामान की सप्लाई चेन बाधित होने का खतरा भी बढ़ रहा है. विशेषज्ञों का कहना है कि लोगों को शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए सतर्क रहना चाहिए.

भारत की तैयारी और सुझाव

भारत सरकार का कहना है कि फिलहाल पेट्रोल-डीजल और एलपीजी का स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन वैश्विक संकट के असर से पूरी तरह बचना संभव नहीं है.

विशेषज्ञ लोगों को सलाह दे रहे हैं कि:

  • अनावश्यक यात्रा से बचें
  • बिजली की बचत करें
  • वैकल्पिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाएं

सरकार भी डिजिटल सिस्टम के जरिए ऊर्जा उपयोग पर नजर रखने की तैयारी कर रही है.

आगे क्या हो सकता है?

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह संकट लंबे समय तक जारी रहा, तो ‘एनर्जी सिक्योरिटी’ के नाम पर सख्त नियम लागू हो सकते हैं. कोरोना महामारी से मिली सीख के आधार पर दुनिया इस बार तेजी से तैयारी कर रही है, लेकिन आम लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है.

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