US-Israel-Iran War: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ को समाप्त करने के संकेत दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि अब वाशिंगटन का इरादा तेहरान पर राजनयिक दबाव बनाने का है ताकि व्यापारिक मार्ग फिर से खुल सकें. यदि यह प्रयास विफल रहता है तो अमेरिका अपने यूरोपीय और खाड़ी सहयोगियों से इस समुद्री रास्ते को खुलवाने का नेतृत्व करने को कह सकता है.
युद्ध के खर्च का बोझ अरब देशों पर डालने का प्रयास
वहीं व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने संकेत दिए हैं कि राष्ट्रपति ट्रंप इस युद्ध के खर्च का बोझ अरब देशों पर डालने में रुचि रख सकते हैं. उन्होंने पत्रकारों से कहा कि ट्रंप इस बात पर विचार कर रहे हैं कि खाड़ी देश इस सैन्य अभियान की लागत में हाथ बटाएं. दरअसल, ट्रंप ने अपने करीबियों से कहा है कि वे युद्ध को रोकने के लिए तैयार हैं, भले ही दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए महत्वपूर्ण Strait of Hormuz फिलहाल बंद रहे.
हॉर्मुज को जबरन खुलवाने का अभियान काफी मुश्किल
ट्रंप का मानना है कि हॉर्मुज के रास्ते को जबरन खुलवाने का अभियान काफी मुश्किल है और इसमें लंबा समय लग सकता है, जबकि वे इस सैन्य संघर्ष को चार से छह सप्ताह के भीतर ही निपटाना चाहते हैं. राष्ट्रपति का आकलन है कि अमेरिका ने अपने मुख्य लक्ष्य—ईरान की नौसेना को पंगु बनाना और उसके मिसाइल भंडार को नष्ट करना काफी हद तक हासिल कर लिए हैं.
खामेनेई सहित कई शीर्ष ईरानी नेताओं की मौत
यह युद्ध 28 फरवरी को तब शुरू हुआ था जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर भीषण हवाई हमले किए थे. इन हमलों में सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई सहित कई शीर्ष ईरानी नेताओं के मारे जाने की खबर है. जवाब में ईरान ने भी खाड़ी देशों जैसे दुबई, कुवैत और कतर पर जवाबी हमले किए हैं. इस तनाव के कारण हॉर्मुज जलमार्ग बंद है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 25 प्रतिशत हिस्सा ठप पड़ा है. भारत जैसे देशों के लिए यह मार्ग अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि उसकी 80 प्रतिशत ऊर्जा आपूर्ति यहीं से होती है.
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