पाकिस्तान में खुदाई के दौरान मिली 5वीं सदी की भगवान शिव से जुड़ी वस्तुएं, विस्तृत अध्ययन शुरू करने का निर्णय

Islamabad: इस्लामिक देश पाकिस्तान में अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसने देश में छिपे हिंदू धर्म के रहस्यों को एक बार फिर से उजागर कर दिया है. Archaeological Survey of India (ASI) के एपिग्राफी डिवीज़न ने एक अहम खोज की है. पाकिस्तान में पुरातत्व विभाग को खुदाई के दौरान 5वीं सदी से जुड़ी भगवान शिव से संबंधित महत्वपूर्ण प्राचीन वस्तुएं मिली हैं.

विस्तृत अध्ययन शुरू करने का निर्णय

वहीं विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे शिलालेख प्राचीन भारतीय उपमहाद्वीप में धार्मिक परंपराओं, मंदिर संस्कृति और सांस्कृतिक संपर्कों को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. फिलहाल, इन खोजों को लेकर विभाग ने आगे और विस्तृत अध्ययन शुरू करने का निर्णय लिया है. मिली वस्तुओं पर ब्राह्मी लिपि में शिलालेख अंकित हैं, जिनसे प्राचीन धार्मिक और ऐतिहासिक जानकारी सामने आई है.

सील लगभग 1500 से 1700 साल पुरानी

विशेषज्ञों के अनुसार इन शिलालेखों को पढ़ने पर ‘देवदरुवन’ और ‘स्वामी कोटेश्वर’ जैसे नाम सामने आए हैं. जानकारी के मुताबिक यह प्राचीन सील लगभग 1500 से 1700 साल पुरानी मानी जा रही है, जो 5वीं सदी से संबंधित है. इस पर लिखा विवरण संकेत देता है कि यह किसी शैव मंदिर से जुड़ी वस्तु हो सकती है, जो हिमालय क्षेत्र के देवदार वनों (देवदरुवन) में स्थित था और भगवान शिव के रूप ‘स्वामी कोटेश्वर’ को समर्पित था.

स्कंदपुराण में बताई गई कहानी से भी जोड़ा

ASI के एपिग्राफी विंग के प्रमुख के. मुनिरत्नम रेड्डी ने सील के बारे में जानकारी दी है. यह सील हांगकांग की फ्रैंकोइस मैंडविल ने ASI के साथ साझा की थी. ASI के एपिग्राफी डिवीज़न के अनुसार, इस सील को स्कंदपुराण में बताई गई उस कहानी से भी जोड़ा जा रहा है, जिसमें भगवान शिव के देवदरुवन में घूमने का जिक्र मिलता है. इसे उस कहानी का अब तक का सबसे पुराना लिखा हुआ और चित्र के रूप में सबूत माना जा सकता है.

इसे भी पढ़ें. Bank Holiday 2026: 1 मई को कहीं बंद तो कहीं खुलेंगे बैंक, बाहर निकलने से पहले चेक करें अपने शहर का स्टेटस

Latest News

Parenting Tips: 10 साल की उम्र से पहले बच्चों को जरूर सिखाएं ये 4 आदतें, जिंदगीभर आएंगी काम

बच्चों की परवरिश सिर्फ पढ़ाई तक सीमित नहीं है. जानिए 10 साल की उम्र से पहले कौन-सी 4 जरूरी आदतें सिखानी चाहिए, जो उनके व्यक्तित्व और आत्मविश्वास को मजबूत बनाती हैं.

More Articles Like This

Exit mobile version