Islamabad: पाकिस्तान में आर्थिक हालत दिनों दिन बिगड़ रही है. यह बात खुद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने स्वीकार किया है. उन्होंने कहा है कि विदेशी कर्ज़ के लिए दुनिया भर में हाथ फैलाना पाकिस्तान के लिए अपमानजनक स्थिति बन चुका है. कर्ज़ लेना हमारे आत्मसम्मान पर बहुत बड़ा बोझ है. ऐसे में विश्लेषकों का मानना है कि शहबाज़ शरीफ का यह बयान केवल एक स्वीकारोक्ति नहीं बल्कि पाकिस्तान की स्थायी संरचनात्मक कमजोरी का खुला प्रमाण है.
भीख मांगते फिरते हैं तो आती है हमें शर्म
इस्लामाबाद में निर्यातकों और उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए शहबाज़ शरीफ ने कहा कि जब फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और मैं दुनिया भर में पैसे के लिए भीख मांगते फिरते हैं तो हमें शर्म आती है. पाकिस्तान इस समय गंभीर ऋण संकट से गुजर रहा है. मार्च 2025 तक देश पर कुल सार्वजनिक कर्ज़ 76,000 अरब पाकिस्तानी रुपये से अधिक हो चुका है जो केवल चार वर्षों में लगभग दोगुना हो गया है. पाकिस्तान इस समय 23वें IMF कार्यक्रम पर निर्भर है.
80 लाख से अधिक लोग नौकरी से बाहर
पाकिस्तान में गरीबी बढ़कर लगभग 45% आबादी तक पहुंच गई है. अत्यधिक गरीबी 4.9% से बढ़कर 16.5% हो चुकी है. बेरोज़गारी दर 7.1% है, 80 लाख से अधिक लोग नौकरी से बाहर हैं. कार्यबल का 85% हिस्सा असंगठित क्षेत्र में फंसा है. विशेषज्ञों का कहना है कि पाकिस्तान ने वियतनाम या बांग्लादेश की तरह निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था बनाने के बजाय कर्ज़ से मिली हॉट मनी का इस्तेमाल कृत्रिम मुद्रा नियंत्रण और अभिजात वर्ग की खपत में किया.
नागरिक शासन और सेना की सीमाएं और धुंधली
कर्ज़ वार्ताओं में सेना प्रमुख की सक्रिय भूमिका यह संकेत देती है कि लेनदारों को भरोसा दिलाने के लिए पाकिस्तान सैन्य प्रतिष्ठान को गारंटर के रूप में पेश कर रहा है, जिससे नागरिक शासन और सेना की सीमाएं और धुंधली हो रही हैं. इस बीच डोनाल्ड ट्रंप के कथित “Board of Peace” में स्थान पाने के लिए भारी राशि खर्च किए जाने की खबरें भी सामने आई हैं, जिससे यह सवाल उठता है कि जब जनता महंगाई और ऊर्जा संकट से जूझ रही है, तब प्राथमिकताएं क्या हैं?
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